सड़क दुर्घटनाएं न केवल शारीरिक और मानसिक पीड़ा देती हैं, बल्कि पीड़ित परिवार को आर्थिक रूप से भी तोड़ देती हैं। ऐसे कठिन समय में राहत देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में एक बेहद संवेदनशील और मानवीय फैसला लिया है। सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि 'मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल' (MACT) द्वारा सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों या उनके परिजनों को दिए जाने वाले मुआवजे पर मिलने वाला ब्याज अब पूरी तरह से इनकम टैक्स (Income Tax) से मुक्त होगा। इस फैसले का सीधा मतलब यह है कि अब सरकार किसी की पीड़ा से होने वाली 'क्षतिपूर्ति' पर अपना हिस्सा नहीं मांगेगी।
TDS का झंझट खत्म, अब मिलेगी पूरी रकम
अक्सर सड़क हादसों के मामले अदालतों में सालों तक चलते हैं। जब लंबे समय बाद कोर्ट का फैसला आता है, तो ट्रिब्यूनल मूल मुआवजे के साथ-साथ देरी के लिए ब्याज भी देता है। वर्तमान नियमों के मुताबिक, इस ब्याज की राशि पर बैंक या बीमा कंपनियां भारी टीडीएस (TDS) काट लेती थीं। इससे पीड़ित को मिलने वाली वास्तविक मदद काफी कम हो जाती थी। लेकिन अब बजट 2026 में किए गए बदलावों के बाद, इस ब्याज भुगतान पर कोई टीडीएस नहीं काटा जाएगा। अब पीड़ितों को कानूनी और टैक्स की जटिल प्रक्रियाओं में नहीं उलझना होगा और उन्हें मिलने वाला एक-एक पैसा बिना किसी कटौती के सीधा उनके हाथ में पहुंचेगा।
क्यों जरूरी था यह फैसला?
कानूनी और सामाजिक नजरिए से देखें तो एक्सीडेंट क्लेम कोई 'कमाई' या 'आय' नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी भरपाई (Compensation) है जो किसी व्यक्ति की शारीरिक क्षति या जान के नुकसान के बदले दी जाती है। कानूनी विशेषज्ञों का लंबे समय से तर्क था कि मुआवजे की मूल भावना पीड़ित को सहारा देना है, न कि उससे टैक्स वसूलना। अब तक ब्याज पर टैक्स लगने के कारण पीड़ित परिवारों को अपनी ही सहायता राशि का एक हिस्सा गंवाना पड़ता था। सरकार के इस कदम से मुआवजे की मूल भावना को मजबूती मिली है, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि कोर्ट द्वारा तय की गई आर्थिक मदद का पूरा लाभ जरूरतमंद तक पहुंचे।
आम आदमी और गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत
यह फैसला उन गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जिन्होंने अपना कमाने वाला सदस्य खो दिया है या जो गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। अदालती चक्करों में अक्सर 5 से 10 साल बीत जाते हैं, जिससे ब्याज की रकम काफी बड़ी हो जाती थी। अब इस ब्याज को टैक्स फ्री और टीडीएस फ्री करके सरकार ने यह संदेश दिया है कि वह न्याय प्रक्रिया में मानवीय दृष्टिकोण को सबसे ऊपर रख रही है। यह न केवल आर्थिक बोझ को कम करेगा, बल्कि पीड़ितों को न्याय मिलने की प्रक्रिया को भी सम्मानजनक बनाएगा।
