बिजनेस

Budget 2026: सरकार के पास 53 लाख करोड़ कहां से आएंगे और कहां होंगे खर्च? यहां है पूरा प्लान

Budget 2026 Expenditure and Spending: बजट 2026-27 के पेश होते ही देश के सामने ₹53.47 लाख करोड़ का विशाल लेखा-जोखा आ गया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इतनी बड़ी रकम सरकार के पास आती कहां से है और यह आपकी शिक्षा, सुरक्षा और विकास पर किस तरह खर्च की जाती है?

Budget Expenditure Spending

Budget Expenditure Spending

Budget 2026 Expenditure and Spending: जब भी देश का बजट पेश होता है, तो आम आदमी के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आखिर सरकार के पास इतना सारा पैसा आता कहां से है और वह इसे खर्च कहां करती है? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹53.47 लाख करोड़ का विशाल बजट पेश किया है। यह राशि पिछले साल के मुकाबले 5.5% ज्यादा है। इस भारी-भरकम राशि के मैनेजमेंट को समझने का सबसे आसान तरीका है '1 रुपये का गणित'। यानी अगर सरकार की कुल कमाई को 1 रुपया मान लिया जाए, तो उसके पास कितने पैसे किस रास्ते से आ रहे हैं और वह उन्हें किन कामों में लगा रही है।

पैसा कहां से आता है? (सरकार की कमाई)

सरकार की कमाई का सबसे बड़ा जरिया टैक्स होता है। 2026-27 के आंकड़ों के अनुसार, सरकार की हर 1 रुपये की कमाई में सबसे बड़ी हिस्सेदारी इनकम टैक्स (आयकर) की है, जिससे लगभग 21 पैसे मिलते हैं। इसके बाद कंपनियों से मिलने वाला कॉर्पोरेट टैक्स आता है, जिसका योगदान 18 पैसे है। देश में लागू जीएसटी (GST) से सरकार को 15 पैसे की कमाई होती है। इसके अलावा, पेट्रोल-डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी से 6 पैसे और विदेशों से आने वाले सामान पर कस्टम ड्यूटी से 4 पैसे मिलते हैं।

टैक्स के अलावा, सरकारी कंपनियों के मुनाफे और डिविडेंड (Non-Tax Revenue) से 10 पैसे और पुराने लोन की वसूली से 2 पैसे आते हैं। हालांकि, अपनी तमाम योजनाओं और विकास कार्यों को पूरा करने के लिए सरकार की यह कमाई कम पड़ जाती है। ऐसे में सरकार को 24 पैसे का उधार भी लेना पड़ता है। इस साल सरकार लगभग ₹16.96 लाख करोड़ का कर्ज लेगी, ताकि देश के इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य जरूरतों को पूरा किया जा सके।

पैसा कहां खर्च होता है? (सरकार के खर्चे)

अब सवाल आता है कि यह पैसा जाता कहां है? सरकार के खर्चों की फेहरिस्त काफी लंबी है। सबसे बड़ा हिस्सा पुराने कर्जों का ब्याज चुकाने (20 पैसे) में निकल जाता है। चूंकि सरकार हर साल भारी कर्ज लेती है, इसलिए उसकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा ब्याज के तौर पर वापस चला जाता है। इसके बाद दूसरा सबसे बड़ा खर्च राज्यों को टैक्स और ड्यूटी में उनका हिस्सा देने में होता है, जो लगभग 22 पैसे है। देश की सुरक्षा यानी डिफेंस (रक्षा) के लिए सरकार 11 पैसे आवंटित करती है।

जनता के कल्याण के लिए चलाई जा रही केंद्र सरकार की अपनी प्रमुख योजनाओं पर 17 पैसे खर्च होते हैं, जबकि राज्यों के साथ मिलकर चलने वाली योजनाओं (Centrally Sponsored Schemes) पर 8 पैसे खर्च किए जाते हैं। इसके अलावा, गरीबों और किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी (खाद, राशन आदि) पर 6 पैसे और सरकारी कर्मचारियों की पेंशन पर 4 पैसे का खर्च आता है। वित्त आयोग की सिफारिशों और अन्य अनुदानों के लिए 7 पैसे रखे जाते हैं, जबकि बाकी के 5 पैसे अन्य छोटे-मोटे प्रशासनिक खर्चों में इस्तेमाल होते हैं।

बजट का पैसा कहां से आएगा?

पैसा कहां से आएगा? (Receipts - ₹53.47 लाख करोड़)

सरकार की कुल कमाई मुख्य रूप से टैक्स, उधारी और गैर-कर राजस्व से होती है। अगर सरकार की कमाई को 100% या 1 रुपया मान लें, तो उसका हिस्सा इस तरह है:

  • आयकर (Income Tax): सरकार की कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा यहीं से आता है। कुल ₹14.66 लाख करोड़ (लगभग 21 पैसे)।
  • कॉर्पोरेट टैक्स (Corporation Tax): कंपनियों से मिलने वाला टैक्स ₹12.31 लाख करोड़ (लगभग 18 पैसे)।
  • जीएसटी (GST): गुड्स एंड सर्विस टैक्स से ₹10.19 लाख करोड़ (लगभग 15 पैसे) की कमाई होगी।
  • उधारी और अन्य देयताएं (Borrowings): खर्चों को पूरा करने के लिए सरकार ₹16.96 लाख करोड़ का कर्ज लेगी (लगभग 24 पैसे)। इसमें से ₹13.03 लाख करोड़ मार्केट लोन से आएंगे।
  • एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty): पेट्रोल-डीजल आदि पर लगने वाले टैक्स से ₹3.89 लाख करोड़ (लगभग 6 पैसे)।
  • कस्टम ड्यूटी (Customs): आयात-निर्यात शुल्क से ₹2.71 लाख करोड़ (लगभग 4 पैसे)।
  • गैर-कर राजस्व (Non-Tax Revenue): सरकारी कंपनियों के मुनाफे और डिविडेंड से ₹6.66 लाख करोड़ (लगभग 10 पैसे)।
  • गैर-ऋण पूंजी प्राप्तियां (Non-Debt Capital Receipts): पुराने लोन की वसूली आदि से ₹0.11 लाख करोड़ (लगभग 2 पैसे)।

पैसा कहां खर्च होगा? (Expenditure - ₹53.47 लाख करोड़)

सरकार अपनी कमाई को देश के विकास, सुरक्षा और कर्ज चुकाने में खर्च करती है। 1 रुपये के खर्च का हिसाब इस तरह है:

  • ब्याज भुगतान (Interest Payments): सरकार द्वारा लिए गए पुराने कर्जों का ब्याज चुकाने में सबसे बड़ा हिस्सा जाता है— ₹14.04 लाख करोड़ (लगभग 20 पैसे)।
  • राज्यों का हिस्सा (States' Share): टैक्स और ड्यूटी में राज्यों की हिस्सेदारी के रूप में ₹15.26 लाख करोड़ दिए जाते हैं (लगभग 22 पैसे)।
  • केंद्रीय योजनाएं (Central Sector Schemes): केंद्र सरकार की अपनी योजनाओं (जैसे रेलवे, डिजिटल इंडिया) पर ₹17.72 लाख करोड़ खर्च होंगे (लगभग 17 पैसे)।
  • प्रायोजित योजनाएं (Centrally Sponsored Schemes): केंद्र और राज्य की मिली-जुली योजनाओं के लिए ₹5.49 लाख करोड़ (लगभग 8 पैसे)।
  • रक्षा (Defense): सेना और सीमाओं की सुरक्षा के लिए ₹7.85 लाख करोड़ के करीब आवंटन है (लगभग 11 पैसे)।
  • सब्सिडी (Subsidies): खाद्य, खाद और ईंधन पर मिलने वाली छूट के लिए ₹4.55 लाख करोड़ (लगभग 6 पैसे)।
  • पेंशन (Pension): सरकारी कर्मचारियों की पेंशन पर ₹2.96 लाख करोड़ खर्च होंगे (लगभग 4 पैसे)।
  • वित्त आयोग और अन्य ट्रांसफर: राज्यों को दी जाने वाली अन्य सहायता और वित्त आयोग की सिफारिशों पर ₹4.41 लाख करोड़ (लगभग 7 पैसे)।
  • अन्य खर्च: प्रशासनिक और अन्य विविध खर्चों पर लगभग 5 पैसे खर्च होते हैं।

देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। बिज़नेस (Business News) अपडेट और आज का सोने का भाव (Gold Rate Today), आज की चांदी का रेट (Silver Rate Today) की ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से।

रिचा त्रिपाठी
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

End of Article