Budget 2023: वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) के लिए आर्थिक सर्वेक्षण यानी इकोनॉमिक सर्वे (Economic Survey) का प्रमुख वार्षिक दस्तावेज माना जाता है। इसमें सभी सैक्टर्स जैसे औद्योगिक, एग्रीकल्चर, मैन्युफैक्चरिंग, आदि की डिटेल में जानकारी होती है। इकोनॉमिक सर्वे में सभी सेक्टर्स के सांख्यिकीय आंकड़े होते हैं, जिससे पिछले वित्तीय वर्ष में देश में आर्थिक विकास की समीक्षा होती है। इकोनॉमिक सर्वे बीते वेत्त वर्ष में देश के पूके मैक्रोइकोनॉमिक्स का विश्लेषण करता है। इसके साथ ही इसके जरिए आने वाले वित्तीय वर्ष की रूपरेखा मिलती है।
पहली बार कब पेश हुआ था आर्थिक सर्वे?
सरकार की ओर से भारत में पहला आर्थिक सर्वे साल 1950- 51 में पेश किया गया था। कई सालों तक यानी 1964 तक इसे केंद्रीय बजट (Union Budget) के साथ पेश किया जाता था। पर इसके बाद इसे बजट से पहले पेश किया जा रहा है।
कब पेश होता है आर्थिक सर्वेक्षण?
सरकार की ओर से आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey of India) हर साल बजट सेशन के दौरान संसद में पेश होता है। आर्थिक सर्वेक्षण पिछले साल के दौरान इकोनॉमी के प्रदर्शन का विश्लेषण करता है।
कौन प्रस्तुत करता है?
इकोनॉमिक सर्वे वित्त मंत्री द्वारा अनुमोदित किया जाता है। इसे आम तौर पर देश के वित्त मंत्री की ओर से संसद में केंद्रीय बजट पेश करने से पहले पेश किया जाता है। इसके कई फायदे होते हैं क्योंकि यह यूनियन बजट को बेहतर तरीके से समझने में मदद करता है।
कौन तैयार करता है आर्थिक सर्वेक्षण?
आर्थिक सर्वेक्षण को केंद्रीय वित्त मंत्रालय में इकोनॉमिक मामलों के डिपार्टमेंट के इकोनॉमिक्स डिवीजन की ओर से तैयार किया जाता है। इसके देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार के मार्गदर्शन में तैयार किया जाता है।
बजट से पहले क्यों होता है पेश?
आर्थिक सर्वेक्षण आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए देश की प्राथमिकता को समझने में मदद करता है। यह संकेत देता है कि केंद्रीय बजट में किन सेक्टर्स पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। इसके दो भाग होते हैं कि देश किन आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है और इसके साथ ही इसमें पिछले साल की समीक्षा भी होती है।
