BSE Share Price Today: धन शोधन निवारण अधिनियम (Prevention of Money Laundering Act) के तहत नामित एक विशेष अदालत ने एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी), मुंबई को एक शिकायत के आधार पर FIR दर्ज करने का निर्देश दिया है। इसमें भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) की पूर्व अध्यक्ष माधबी पुरी बुच और पांच अन्य के खिलाफ शेयर बाजार में धोखाधड़ी और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। बुच के अलावा बाकी 5 लोगों में बीएसई के चेयरमैन भी शामिल हैं। इससे BSE के शेयर में गिरावट आई है। करीब पौने 10 बजे BSE का शेयर 115.25 रु या 2.49 फीसदी की गिरावट के साथ 4518.45 रु पर है।
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किस-किस का नाम FIR में होगा शामिल
अदालत ने शनिवार को रिकॉर्ड पर मौजूद जानकारी देखने के बाद कहा, "आरोपों से संज्ञेय अपराध का पता चलता है, जिसकी जांच जरूरी है। प्रथम दृष्टया रेगुलेटरी चूक और मिलीभगत के सबूत हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच की जरूरत है। कानून प्रवर्तन और सेबी की निष्क्रियता के कारण धारा 156(3) सीआरपीसी के तहत न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत है।"शिकायत में एसीबी को एफआईआर दर्ज करने और “प्रस्तावित आरोपियों” द्वारा किए गए कथित अपराधों की जांच करने का निर्देश देने की मांग की गई, जिसमें बुच, तीन सेबी होल-टाइम मेंबर्स और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल और सीईओ सुंदररामन राममूर्ति शामिल हैं।
क्या है पूरा मामला
विशेष न्यायाधीश एस ई बांगर ने डोंबिवली के निवासी सपन श्रीवास्तव के आवेदन पर यह आदेश पारित किया, जिन्होंने खुद को पत्रकार बताया था। आवेदन में रेगुलेटरी अधिकारियों की कथित मिलीभगत से स्टॉक एक्सचेंज में एक कंपनी की धोखाधड़ी से लिस्टिंग का आरोप लगाया गया था।
श्रीवास्तव ने दावा किया कि उन्होंने और उनके परिवार ने 13 दिसंबर, 1994 को कैल्स रिफाइनरीज लिमिटेड के शेयरों में निवेश किया था, जो बीएसई इंडिया में लिस्टेड थी, और उन्हें भारी नुकसान हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि सेबी और बीएसई ने फर्म के अपराधों की अनदेखी की, इसे कानून के खिलाफ लिस्ट किया गया और निवेशकों के हितों की रक्षा नहीं की गयी।
'कॉर्पोरेट धोखाधड़ी को बढ़ावा दिया'
श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि सेबी अधिकारियों ने कंपनी की लिस्टिंग की अनुमति देकर बाजार में हेरफेर और कॉर्पोरेट धोखाधड़ी को बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस और नियामक अधिकारियों ने उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं की, जिसके कारण उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
डिस्क्लेमर : यहां मुख्य तौर पर शेयर के रिटर्न की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। इक्विटी मार्केट में जोखिम होता है, इसलिए निवेश अपने जोखिम पर करें। निवेश करने से पहले एक्सपर्ट की राय जरूर लें।
