Bihar Highway Construction Silt Project: बिहार में बाढ़ की समस्या से निपटने और राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण को गति देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने एक नई पहल की है। इसके तहत नदियों से निकाली जाने वाली गाद (सिल्ट) का इस्तेमाल हाईवे निर्माण में किया जाएगा। दरअसल, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और बिहार सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर हुए हैं। इस समझौते के तहत गाद का इस्तेमाल सड़क निर्माण सामग्री के रूप में किया जाएगा। इससे नदियों की जल-वहन क्षमता बढ़ाने के साथ बाढ़ के जोखिम को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
इस समझौते पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए।
16 हाईवे परियोजनाओं में इस्तेमाल होगी गाद
समझौते के तहत बिहार में फिलहाल निर्माणाधीन 16 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में नदियों से निकाली गई कुल 243 लाख घन मीटर गाद का मुफ्त इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा, भविष्य में शुरू होने वाली 27 परियोजनाओं में अनुमानित 835 लाख घन मीटर गाद के इस्तेमाल का प्रस्ताव है। इस तरह बड़ी मात्रा में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन का इस्तेमाल बुनियादी ढांचे के विकास में किया जा सकेगा।
सरकार के मुताबिक, बिहार में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की करीब 1,561 किलोमीटर लंबाई वाली 39 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। इनकी कुल लागत लगभग 58,340 करोड़ रुपये है। वहीं, करीब 1,982 किलोमीटर लंबाई की 11 नई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिन पर लगभग 1.85 लाख करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
बाढ़ नियंत्रण और सड़क निर्माण को मिलेगा फायदा
बिहार में गंगा, कोसी, गंडक, बागमती और फल्गु जैसी नदियों में लगातार गाद जमा होने से पानी के बहाव और जल निकासी में परेशानी होती है। इससे कई इलाकों में मौसमी बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में नदियों से वैज्ञानिक तरीके से गाद निकालने पर उनकी जल-वहन क्षमता में सुधार हो सकता है। इस पहल को NHAI आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों से आगे बढ़ाएगा। निकाली गई गाद का इस्तेमाल हाईवे निर्माण में किया जाएगा। इससे सड़क परियोजनाओं की लागत घटाने, निर्माण सामग्री की उपलब्धता बढ़ाने और प्राकृतिक उपजाऊ ऊपरी मिट्टी के दोहन को कम करने में मदद मिल सकती है।
