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अनिल अंबानी ने जीत ली ये कौन सी बाजी, मिलेंगे 1169 करोड़ रुपये, खुद कोर्ट ने दिया आदेश

Anil Ambani: बंबई हाईकोर्ट ने मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) को अनिल अंबानी की रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की सहायक कंपनी मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड (MMOPL) के साथ विवाद के संबंध में मध्यस्थता पुरस्कार के तहत 1,169 करोड़ रुपये की राशि अदालत की रजिस्ट्री में जमा कराने का निर्देश दिया।

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अनिल अंबानी की बड़ी जीत

Photo : PTI

Anil Ambani: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार (10 जून 2025) को अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) को उसकी सहायक कंपनी मुंबई मेट्रो वन प्रा.लि.(MMOPL) को ₹1,169 करोड़ की भुगतान राशि 15 जुलाई 2025 तक अदा करने का निर्देश दिया है। यह आदेश एक लम्बे समय से पेंडिंग मध्यस्थता अवार्ड से संबंधित है।

रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए यह निर्णय एक बड़ी राहत लेकर आया है। कंपनी MMOPL में 74% हिस्सेदारी रखती है, जबकि MMRDA के पास बाकी 26% है। मुंबई मेट्रो का यह पहला कॉरिडोर (वर्सोवा-अंधेरी-घाटकोपर लाइन) 12 किमी लंबा है और यह 2014 से चालू है। हाल ही में इस सर्विस ने 11 साल पूरे किए हैं।

अगस्त 2023 में एक तीन-सदस्यीय मध्यस्थता ट्रिब्यूनल ने MMOPL को ₹992 करोड़ का अवार्ड दिया था, जो लागत विवादों को लेकर MMRDA के साथ हुआ था। अब हाईकोर्ट ने MMRDA द्वारा दायर चुनौती (Arbitration and Conciliation Act, 1996 की धारा 34 के तहत) को खारिज कर दिया है और ब्याज सहित पूरी राशि अदा करने को कहा है।

रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को जानकारी दी कि यह धनराशि MMOPL के कर्ज को कम करने के लिए उपयोग की जाएगी। इस घोषणा के बाद रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के शेयरों में उछाल आया। मंगलवार को शेयर 3.53% बढ़कर ₹404.40 हो गया, जबकि बुधवार को थोड़ा घटकर ₹400.00 पर बंद हुआ। मार्च 2025 से अब तक शेयरों में 100% से अधिक की बढ़ोतरी हो चुकी है। रिलायंस ग्रुप के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह धनराशि वित्तीय पुनरुद्धार और संचालन की निरंतरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

परियोजना की लागत और वित्तीय संकट

मुंबई मेट्रो लाइन 1 परियोजना को 2007 में भारत की पहली सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मेट्रो परियोजना के रूप में शुरू किया गया था, जिसकी अनुमानित लागत ₹2,356 करोड़ थी। लेकिन देरी और कार्यक्षेत्र में बदलावों के कारण इसकी लागत बढ़कर ₹4,321 करोड़ हो गई। इस लागत की पूर्ति के लिए कैनरा बैंक की अगुवाई में एक बैंक संघ ने फंडिंग की थी, जिसमें इंडियन बैंक, एसबीआई, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, आईडीबीआई बैंक और इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी (UK) शामिल थे। हालांकि, नवंबर 2024 तक यह बैंक संघ ₹1,226 करोड़ के संकटग्रस्त कर्ज को बेचने की तैयारी में था, क्योंकि MMOPL की वित्तीय स्थिति लगातार बिगड़ रही थी।

NCLT में मामला और हिस्सेदारी बिक्री में रुकावटें

एसबीआई और आईडीबीआई जैसे सरकारी बैंकों ने MMOPL के खिलाफ ₹500 करोड़ से अधिक के बकाया को लेकर दिवालियापन याचिकाएं दायर की थीं। लेकिन अप्रैल 2024 में NCLT की मुंबई बेंच ने एकमुश्त समझौते के बाद इन याचिकाओं को खारिज कर दिया। मार्च 2024 में महाराष्ट्र सरकार ने MMRDA के जरिये रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर की MMOPL में 74% हिस्सेदारी को ₹4,000 करोड़ में खरीदने की मंजूरी दी थी, लेकिन जून 2024 में द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार यह डील MMRDA की वित्तीय कठिनाइयों के कारण अटक गई है।

आगे की राह

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि यह अवार्ड रिलायंस इन्फ्रा को अल्पकालिक स्थिरता प्रदान करता है, लेकिन स्थायी सुधार इसके धन के समय पर उपयोग और समूहीय कर्ज समाधान पर निर्भर करेगा। कभी भारत के प्रमुख उद्योगपतियों में शामिल रहे अनिल अंबानी के लिए यह अदालती आदेश उनके इन्फ्रास्ट्रक्चर और पावर सेक्टर के कारोबार को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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