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Bharat Coking Coal IPO: ₹1071 करोड़ का इश्यू, ₹1.14 लाख करोड़ की बोली, अब अलॉटमेंट की जंग

Bharat Coking Coal IPO ने निवेशकों के बीच जबरदस्त क्रेज दिखा। ₹1,071 करोड़ के इश्यू के सामने करीब ₹1,14,786 करोड़ से ज्यादा की बोली लगी। IPO कुल 143.85 गुना ओवरसब्सक्राइब होकर बंद हुआ, जिसमें QIB कैटेगरी 310.81 गुना और NII 240.49 गुना तक पहुंच गई। रिटेल निवेशकों के लिए 49.37 गुना रहा, जिससे अलॉटमेंट की उम्मीदें अब काफी हद तक “लॉटरी” जैसी हो गई हैं। अब बाजार की नजर 14 जनवरी को होने वाले Allotment पर है, जबकि लिस्टिंग 16 जनवरी को होने की संभावना है।

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ताबड़तोड़ सब्सक्रिप्शन (इमेज क्रेडिट, कैन्वा)

Bharat Coking Coal IPO के बंद होते ही बाजार में चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा अब रिटर्न नहीं, बल्कि अलॉटमेंट बन गया है। वजह साफ है। इश्यू को कुल मिलाकर 143.85 गुना सब्सक्रिप्शन मिला है, यानी जितने लॉट ऑफर किए गए, उनके मुकाबले 143 गुना ज्यादा बोली लगी है। ऐसे में जिन निवेशकों ने आवेदन किया है, उनके लिए अब यह IPO ‘इन्वेस्टमेंट’ से ज्यादा ‘लॉटरी’ जैसा बनता दिख रहा है।

QIB ने आखिरी दिन मचाया धमाल

सब्सक्रिप्शन डाटा का सबसे बड़ा संकेत यह है कि खेल आखिरी दिन पलटा। Day-1 पर कुल सब्सक्रिप्शन 8.18 गुना था, जो Day-2 पर बढ़कर 33.89 गुना पहुंचा और फिर Day-3 पर सीधे 143.85 गुना पर बंद हुआ। असली ट्विस्ट QIB कैटेगरी में दिखा। QIB ने Day-1 पर 0.30 गुना सब्सक्राइब किया। वहीं, Day-2 पर 1.44 गुना रहा। लेकिन, Day-3 पर यह सीधे 310.81 गुना पहुंच गया। आमतौर पर यह पैटर्न बताता है कि बड़े संस्थागत निवेशक आखिरी समय पर बोली लगाकर अपनी स्ट्रेटजी के हिसाब से पोजिशन बनाते हैं और IPO में मजबूत संस्थागत डिमांड का संकेत देते हैं।

Retail में अलॉटमेंट की संभावना बेहद कम

रिटेल निवेशकों के लिए तस्वीर साफ है। Retail कैटेगरी में सब्सक्रिप्शन 49.37 गुना रहा। इसका मतलब यह है कि रिटेल के लिए जितने शेयर उपलब्ध थे, उसके मुकाबले लगभग 49 गुना ज्यादा डिमांड आ गई। ऐसे हाई ओवरसब्सक्रिप्शन में अलॉटमेंट का गणित तेजी से निवेशक के खिलाफ चला जाता है, क्योंकि यहां अलॉटमेंट का आधार लॉटरी सिस्टम होता है। सरल अनुमान के हिसाब से देखा जाए तो अगर अधिकतर आवेदन एक लॉट के आसपास हैं, तो औसतन हर 49 आवेदकों में से लगभग 1 को ही शेयर मिलने की संभावना बनती है। यही वजह है कि रिटेल निवेशकों के लिए यह IPO अब हाई रिटर्न से ज्यादा हाई प्रेशर वाली ‘अलॉटमेंट रेस’ बन चुका है।

HNI में भीड़ और ज्यादा

अगर किसी को लग रहा है कि HNI यानी NII कैटेगरी में अलॉटमेंट आसान होगा, तो डाटा उल्टा संकेत देता है। क्योंकि NII कैटेगरी में सब्सक्रिप्शन 240.49 गुना रहा, जिसमें bNII 275.64 गुना और sNII 222.78 गुना तक पहुंच गया। इतना हाई ओवरसब्सक्रिप्शन बताता है कि यहां मुकाबला रिटेल से भी ज्यादा कट-थ्रोट है। NII में अलॉटमेंट का तरीका प्रो-राटा हो सकता है, लेकिन जब डिमांड इतनी ज्यादा हो जाती है, तो निवेशकों को हिस्सेदारी बेहद कम मिलती है। दूसरे शब्दों में, HNI में सवाल यह नहीं रह जाता कि अलॉटमेंट मिलेगा या नहीं, बल्कि यह बन जाता है कि मिलेगा तो कितना मिलेगा।

शेयरहोल्डर कोटा भी 87.20x भरा

Bharat Coking Coal IPO में Shareholders कैटेगरी का सब्सक्रिप्शन 87.20 गुना रहा। कई बार निवेशक मानते हैं कि शेयरहोल्डर्स कोटे में भीड़ कम होती है और अलॉटमेंट चांस बेहतर होते हैं, लेकिन 87 गुना का आंकड़ा बताता है कि यहां भी दबाव बहुत ज्यादा है। यह कैटेगरी रिटेल के मुकाबले अलग जरूर है, लेकिन ओवरसब्सक्रिप्शन इतना ऊंचा है कि अलॉटमेंट की उम्मीद यहां भी सीमित ही रहेगी।

Employees कैटेगरी में भी कड़ी रेस

पूरे सब्सक्रिप्शन डेटा में अगर किसी कैटेगरी में तुलनात्मक राहत दिखती है तो वह Employees कैटेगरी है, जहां सब्सक्रिप्शन 5.17 गुना रहा। यह अब भी ओवरसब्सक्राइब है, लेकिन रिटेल और NII के मुकाबले काफी कम है। ऐसे में कर्मचारी कोटे में आवेदन करने वाले निवेशकों के लिए अलॉटमेंट चांस बाकी कैटेगरी के मुकाबले बेहतर माने जा सकते हैं।

₹1.14 लाख करोड़ से ज्यादा की बोली

कुल मिलाकर IPO में ₹1,14,786.35 करोड़ की बोली लगी हैं। QIB कैटेगरी में ही बोली की रकम ₹56,595 करोड़ के करीब रही, जबकि NII में ₹32,843 करोड़ और रिटेल में ₹15,731 करोड़ से ज्यादा का दांव लगा। इतनी बड़ी डिमांड यह बताती है कि IPO को लेकर निवेशकों का सेंटीमेंट बेहद मजबूत रहा है और इश्यू ने बाजार में भारी रुचि खींची है।

GMP ₹10.6 पर स्थिर

ग्रे मार्केट में भी Bharat Coking Coal IPO का प्रीमियम मजबूत बना हुआ है। आखिरी अपडेट के मुताबिक GMP ₹10.6 है। ₹23 के प्राइस बैंड पर यह अनुमानित लिस्टिंग प्राइस करीब ₹33.6 बैठता है, यानी संभावित लिस्टिंग गेन लगभग 46 प्रतिशत के आसपास दिख रहा है। हालांकि निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि GMP कोई गारंटी नहीं है, यह सिर्फ बाजार की अनौपचारिक धारणा दिखाता है। लेकिन इतना जरूर है कि जब IPO में QIB की भागीदारी इतनी ऊंची हो और GMP मजबूत बना रहे, तो लिस्टिंग पर वॉल्यूम और वोलैटिलिटी दोनों तेज रहने की संभावना बढ़ जाती है।

अब आगे क्या?

IPO 13 जनवरी 2026 को बंद हो चुका है और अब अगला बड़ा ट्रिगर Allotment Finalisation है, जो 14 जनवरी को होना है। इसके बाद 15 जनवरी को रिफंड और डिमैट क्रेडिट की प्रक्रिया होगी और 16 जनवरी को लिस्टिंग होने की उम्मीद है। यानी अगले 48 से 72 घंटे निवेशकों के लिए निर्णायक रहेंगे, क्योंकि यहीं से साफ होगा कि किसे शेयर मिले और किसे बाजार से लिस्टिंग के बाद एंट्री की रणनीति बनानी पड़ेगी।

डिस्क्लेमर: ग्रे मार्केट प्रीमियम किसी भी तरह से SEBI या स्टॉक एक्सचेंज द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है। TimesNow Hindi किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले निवेशकों को अपनी रिसर्च या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

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यतींद्र लवानिया
यतींद्र लवानिया author

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों... और देखें

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