बिजनेस

अब बिना बताए बैंक नहीं काट सकेंगे पैसे! मनमानी पर जान लें RBI का नया नियम

  • Agency by: Agency
  • Updated Apr 23, 2026, 10:57 AM IST

क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ है कि आपके बैंक खाते से पैसे कट गए? चाहे वो किसी ऐप का सब्सक्रिप्शन हो या कोई छिपी हुई फीस, बैंकों की इस मनमानी पर अब RBI ने कड़ा लगाम लगा दिया है।

Image

Banking Rules

डिजिटल बैंकिंग के इस दौर में हम अक्सर अपने ओटीटी सब्सक्रिप्शन, जिम की फीस, मोबाइल बिल या बैंक की ईएमआई (EMI) के लिए 'ऑटो-डेबिट' की सुविधा का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि हमें पता भी नहीं चलता और हमारे खाते से पैसे कट जाते हैं। ग्राहकों की इसी परेशानी को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बेहद सख्त और राहत भरा नियम लागू किया है। अब कोई भी बैंक या वित्तीय संस्थान आपकी जानकारी के बिना या बिना बताए आपके खाते से एक रुपया भी नहीं काट सकेगा। आरबीआई का यह कदम बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता लाने और ग्राहकों के पैसे को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया है।

क्या है 'प्री-डेबिट नोटिफिकेशन' का नियम?

आरबीआई के नए नियमों के अनुसार, अगर आपने किसी सर्विस के लिए ई-मैंडेट (e-mandate) सेट किया हुआ है, तो बैंक को पैसे काटने से कम से कम 24 घंटे पहले आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक 'प्री-डेबिट नोटिफिकेशन' (Pre-debit Notification) भेजना अनिवार्य होगा। इस मैसेज या ईमेल में यह साफ लिखा होना चाहिए कि किस तारीख को, कितनी राशि और किस मर्चेंट के लिए काटी जा रही है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यदि आपके पास उस समय पर्याप्त बैलेंस नहीं है या आप वह पेमेंट नहीं करना चाहते, तो आपके पास उसे रोकने या मैनेज करने का समय होगा।

5,000 रुपये से ज्यादा के भुगतान पर अतिरिक्त सुरक्षा

आरबीआई ने सुरक्षा की एक और परत जोड़ते हुए बड़ी राशि के ट्रांजैक्शन पर नियमों को और कड़ा कर दिया है। अगर आपका कोई ऑटो-डेबिट पेमेंट 5,000 रुपये से अधिक का है, तो बैंक को केवल नोटिफिकेशन भेजकर पैसे काटने का अधिकार नहीं होगा। ऐसे मामलों में बैंक को ग्राहक से 'एडिशनल फैक्टर ऑफ ऑथेंटिकेशन' (AFA) यानी एक ओटीपी (OTP) के जरिए मंजूरी लेनी होगी। बिना ओटीपी कन्फर्मेशन के बड़ी राशि का ऑटो-डेबिट भुगतान प्रोसेस नहीं किया जाएगा। यह नियम ऑनलाइन धोखाधड़ी और अनचाहे सब्सक्रिप्शन चार्जेस से बचने में ग्राहकों की मदद करेगा।

ई-मैंडेट को मैनेज करना हुआ आसान

अक्सर ग्राहकों को यह शिकायत रहती थी कि एक बार ऑटो-डेबिट शुरू करने के बाद उसे बंद करना सिरदर्द बन जाता है। बैंक और कंपनियां इसे रोकने की प्रक्रिया को जानबूझकर जटिल बना देती थीं। लेकिन अब आरबीआई ने बैंकों को आदेश दिया है कि वे ग्राहकों को एक ऐसा डैशबोर्ड या पोर्टल प्रदान करें जहाँ वे अपने सभी सक्रिय ई-मैंडेट्स को देख सकें। ग्राहक जब चाहे, केवल एक क्लिक से किसी भी ऑटो-डेबिट सुविधा को संशोधित (Modify) कर सकता है या पूरी तरह से रद्द (Cancel) कर सकता है। इसके लिए उसे अब बैंक के चक्कर काटने या कस्टमर केयर पर घंटों इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं होगी।

बैंक की होगी जवाबदेही

अगर कोई बैंक इन नियमों का पालन नहीं करता और बिना सूचना दिए या बिना मैंडेट के पैसे काट लेता है, तो ग्राहक इसकी शिकायत सीधे बैंकिंग लोकपाल (Banking Ombudsman) से कर सकते हैं। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि अगर बैंक की गलती से कोई गलत ट्रांजैक्शन होता है, तो बैंक को न केवल वह पैसा वापस करना होगा, बल्कि ग्राहक को हुए मानसिक या आर्थिक नुकसान की भरपाई भी करनी पड़ सकती है। डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन के बीच यह नियम आम आदमी को बैंकिंग सिस्टम पर भरोसा दिलाने का काम करेगा।

End of Article