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सऊदी पर हमलों से फिर भड़की Crude Oil की आग, अब दुनिया को रूस से राहत की उम्मीद

सऊदी अरब पर हूतियों के हमलों के बाद क्रूड के दाम फिर आसमान छूने लगे हैं। हालांकि, अमेरिका और रूस के बीच हुए डीजल समझौते की वजह से एनर्जी मार्केट में राहत की उम्मीद है।

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क्रूड के दाम उछले

Crude Oil Price Hike : कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों पर एक बार फिर जियोपॉलिटक तनाव का असर दिख रहा है। सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमलों और समुद्री रास्तों पर टैंकरों को निशाना बनाए जाने से ग्लोबल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूस से डीजल सप्लाई बढ़ाने के समझौते और रूस-यूक्रेन के बीच ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के ऐलान ने बाजार को कुछ राहत दी है। सोमवार, 12 अक्टूबर को शुरुआती कारोबार में तेजी दिखाने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

$105 के पार पहुंचा क्रूड, फिर गिरने लगा भाव?

पश्चिम एशिया (West Asia) में तनाव बढ़ने से सोमवार को शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 105.48 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। हालांकि, रूस से अतिरिक्त ऊर्जा सप्लाई आने की उम्मीद के बीच कीमतों ने गिरावट का रुख पकड़ लिया। फिलहाल, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर 1.47% गिरकर 103.18 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 1.68% टूटकर 90.31 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। यानी बाजार में फिलहाल दो विपरीत ताकतें काम कर रही हैं। पश्चिम एशिया में सप्लाई बाधित होने का खतरा और रूस से अतिरिक्त ईंधन मिलने की उम्मीद।

सऊदी अरब पर हमलों ने बढ़ाई सप्लाई की चिंता

यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हमले की जिम्मेदारी ली है। शनिवार के हमले में 13 लोगों की मौत हुई और 300 से अधिक घायल हुए। रविवार को एयरपोर्ट पर एक और हमले की खबर आई। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब की सैन्य कार्रवाई में शामिल होने पर विचार कर रहा है।

इससे क्षेत्रीय संघर्ष के और व्यापक होने की आशंका बढ़ गई है। समुद्री रास्तों पर भी खतरा बना हुआ है। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने सप्ताहांत में ओमान के पास सोहर एंकरिज और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले टैंकरों पर हमलों की सूचना दी। ये घटनाएं तेल की अंतरराष्ट्रीय सप्लाई और परिवहन लागत के लिए जोखिम बढ़ाती हैं।

रूस से कैसे मिल सकती है राहत?

तेल बाजार के लिए राहत की दूसरी उम्मीद रूस से है। ट्रंप ने शुक्रवार को घोषणा की थी कि रूस अमेरिका और वैश्विक बाजारों को तुरंत 3 लाख मीट्रिक टन से अधिक डीजल उपलब्ध कराएगा। यह मात्रा करीब 22.5 लाख बैरल के बराबर है। इसके अलावा नवंबर में 5 लाख टन और उसके बाद 10 लाख टन अतिरिक्त डीजल देने की बात भी कही गई है। ट्रंप ने रविवार को यह भी कहा कि रूस और यूक्रेन ऊर्जा ठिकानों पर एक-दूसरे के हमले रोकने के लिए सहमत हो गए हैं।

इससे ऊर्जा इन्फ्रास्ट्रक्चर को नुकसान और सप्लाई बाधित होने की आशंका कम हो सकती है। हालांकि, इस कथित सीजफायर की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि वह समझौते का विवरण मिलने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि रूस की ओर से तत्काल इसकी पुष्टि नहीं की गई। यूक्रेन ने ऊर्जा ठिकानों पर रूसी हमले जारी रहने की भी बात कही है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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