MSME : भारत को आत्मनिर्भर बनाने की नई योजना को गडकरी ने दी मंजूरी, सरकार दे रही है मदद, शुरू करें बिजनेस

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Aug 3, 2020, 12:32 PM IST

केंद्रीय MSME मंत्री नितिन गडकरी ने अगरबत्ती उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) के रोजगार सृजन कार्यक्रम के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

MSME : भारत को आत्मनिर्भर बनाने की नई योजना को गडकरी ने दी मंजूरी, सरकार दे रही है मदद, शुरू करें बिजनेस
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देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) आगे आया है। केंद्रीय MSME मंत्री नितिन गडकरी ने अगरबत्ती उत्पादन में भारत को आत्म-निर्भर बनाने  के लिए खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) द्वारा प्रस्तावित एक अद्वितीय रोजगार सृजन कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है। ‘खादी अगरबत्ती आत्म-निर्भर मिशन’ नाम के इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों में बेरोजगारों और प्रवासी श्रमिकों के लिए रोजगार पैदा करना और घरेलू अगरबत्ती उत्पादन में पर्याप्त तेजी लाना है। इस प्रस्ताव को पिछले महीने मंजूरी के लिए MSME मंत्रालय के समक्ष रखा गया था। प्रायोगिक परियोजना जल्द ही शुरू की जाएगी। इस परियोजना के पूर्ण कार्यान्वयन होने पर अगरबत्ती उद्योग में हजारों की संख्या में रोजगार के अवसर का सृजन होगा।

प्राइवेट सार्वजनिक मोड पर KVIC द्वारा बनाई गई यह योजना इस मायने में अद्वितीय है कि बहुत कम निवेश में ही यह स्थाई रोजगार का सृजन करेगा और प्राइवेट अगरबत्ती निर्माताओं को उनके बिना किसी पूंजी निवेश के अगरबत्ती का उत्पादन बढ़ाने में मदद करेगी। इस योजना के तहत, KVIC सफल प्राइवेट अगरबत्ती निर्माताओं के माध्यम से कारीगरों को अगरबत्ती बनाने की स्वचालित मशीन और पाउडर मिक्सिंग मशीन उपलब्ध कराएगा जो व्यापार भागीदारों के रूप में समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। KVIC ने केवल स्थानीय रूप से भारतीय निर्माताओं द्वारा निर्मित मशीनों की खरीद का फैसला किया है, जिसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहित करना भी है।

KVIC मशीनों की लागत पर 25% सब्सिडी प्रदान करेगा और कारीगरों से हर महीने आसान किस्तों में शेष 75% की वसूली करेगा। व्यापार भागीदार कारीगरों को अगरबत्ती बनाने के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराएगा और उन्हें काम के आधार पर मजदूरी का भुगतान करेगा। कारीगरों के प्रशिक्षण की लागत KVIC और निजी व्यापार भागीदार के बीच साझा की जाएगी, जिसमें KVIC लागत का 75% वहन करेगा, जबकि 25% व्यापार भागीदार द्वारा भुगतान किया जाएगा।

अगरबत्ती बनाने की प्रत्येक स्वचालित मशीन प्रति दिन करीब 80 किलोग्राम अगरबत्ती बनाती है जिससे 4 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। अगरबत्ती बनाने की 05 मशीनों के सेट पर एक पाउडर मिक्सिंग मशीन दी जाएगी, जिससे 2 लोगों को रोजगार मिलेगा।

अभी अगरबत्ती बनाने की मजदूरी 15 रुपए प्रति किलोग्राम है। इस दर से एक स्वचालित अगरबत्ती मशीन पर काम करने वाले 4 कारीगर 80 किलोग्राम अगरबत्ती बनाकर प्रतिदिन न्यूनतम 1200 रुपए कमाएंगे। इसलिए प्रत्येक कारीगर प्रति दिन कम से कम 300 रुपए कमाएगा। इसी तरह पाउडर मिक्सिंग मशीन पर प्रत्येक कारीगर को प्रति दिन 250 रुपए की निश्चित राशि मिलेगी।

योजना के अनुसार,  व्यापार भागीदारों द्वारा साप्ताहिक आधार पर कारीगरों को मजदूरी सीधे उनके खातों में केवल प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से प्रदान की जाएगी। कारीगरों को कच्चे माल की आपूर्ति, लॉजिस्टिक्स,  गुणवत्ता नियंत्रण और अंतिम उत्पाद का विपणन करना केवल व्यापार भागीदार की जिम्मेदारी होगी। मशीन की शेष 75% लागत की वसूली के बाद इसका मालिकाना हक स्वत: कारीगरों को स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

इस संबंध में पीपीपी मोड पर परियोजना के सफल संचालन के लिए KVIC और निजी अगरबत्ती निर्माता के बीच दो-पक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस योजना को दो प्रमुख फैसलों, अगरबत्ती के कच्चे माल पर आयात प्रतिबंध और बांस के डंडों पर आयात शुल्क में बढ़ोत्‍तरी, को देखते हुए बनाया गया। ये फैसले नितिन गडकरी की पहल पर क्रमश: वाणिज्य मंत्रालय और वित्त मंत्रालय द्वारा लिए गए।

 KVIC के अध्यक्ष श्री विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि केंद्र सरकार के दो फैसलों ने अगरबत्ती उद्योग में रोजगार के बड़े अवसर पैदा किए हैं। उन्होंने कहा कि रोजगार सृजन के बड़े अवसर को भुनाने के लिए KVIC ने ‘खादी अगरबत्ती आत्म-निर्भर मिशन’ नामक एक कार्यक्रम तैयार किया और मंजूरी के लिए MSME मंत्रालय के समक्ष प्रस्तुत किया।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य कारीगरों का साथ देना और स्थानीय अगरबत्ती उद्योग की मदद करना है। देश में अगरबत्ती की वर्तमान खपत लगभग 1490 मीट्रिक टन प्रतिदिन है। हालांकि, भारत में अगरबत्ती का उत्पादन प्रतिदिन केवल 760 मीट्रिक टन ही है। मांग और आपूर्ति के बीच बहुत बड़ा अंतर है। इसलिए, इसमें रोजगार सृजन की अपार संभावनाएं हैं।
 

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