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Bank Account में Average Monthly Balance बनाए रखना क्यों जरूरी, जानिए इसके फायदे

Average Monthly Balance Benefits: क्या आप जानते हैं जब आप किसी बैंक में अपना सेविंग अकाउंट ओपन करवाते हैं तो आपको इसमें एवरेज मंथली बैलेंस बनाए रखना जरूरी होता है।

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बैंक अकाउंट में Average Monthly Balance क्यों बनाए रखें (AI Generated Image)

Average Monthly Balance Benefits: बैंक में सेविंग अकाउंट (Savings Account) खुलवाने के बाद ग्राहकों को कई नियमों का पालन करना पड़ता है। इनमें से एक अहम नियम एवरेज मंथली बैलेंस (Average Monthly Balance) AMB बनाए रखना है। कई बार ग्राहकों को लगता है कि महीने की शुरुआत या अंत में खाते में पर्याप्त पैसा होना जरूरी है, लेकिन ऐसा नहीं है। बैंक पूरे महीने के दौरान खाते में मौजूद डेली क्लोजिंग बैलेंस के औसत के आधार पर इसकी कैलकुलेशन करता है। इतना ही नहीं, एक तय बैलेंस नहीं रखने पर बैंक नियमों के अनुसार चार्ज लगा सकता है।

क्या होता है एवरेज मंथली बैलेंस?

एवरेज मंथली बैलेंस वह औसत राशि है, जिसे ग्राहक को अपने सेविंग अकाउंट में एक महीने के दौरान बनाए रखना होता है। इसकी कैलकुलेशन महीने के प्रत्येक दिन के क्लोजिंग बैलेंस को जोड़कर और कुल राशि को महीने के दिनों की संख्या से विभाजित कर की जाती है। इसकी जरूरत बैंक, अकाउंट के प्रकार और ब्रांच की लोकेशन के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।

उदाहरण के लिए अगर किसी खाते में 30 दिनों के डेली क्लोजिंग बैलेंस का कुल योग 3 लाख रुपये है तो उसका एवरेज मंथली बैलेंस 10,000 रुपये होगा।

बैंक में कितना रखना होता है बैलेंस?

HDFC Bank के अनुसार, रेगुलर सेविंग अकाउंट में मेट्रो और शहरी क्षेत्रों के लिए 10,000 रुपये, जबकि सेमी-अर्बन क्षेत्रों में 5,000 रुपये का AMB निर्धारित है। वहीं, DigiSave Youth अकाउंट में मेट्रो और शहरी क्षेत्रों के लिए 5,000 रुपये तथा सेमी-अर्बन क्षेत्रों के लिए 2,500 रुपये का औसत बैलेंस आवश्यक है। Savings Max अकाउंट के लिए यह राशि 25,000 रुपये है। इसी तरह, अलग-अलग बैंक में अलग-अलग AMB निर्धारित हो सकता है।

AMB बनाए रखने के क्या हैं फायदे?

औसत मासिक बैलेंस बनाए रखने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ग्राहक न्यूनतम बैलेंस की कमी से जुड़े चार्ज से बच सकते हैं। इसके अलावा, खाते में पर्याप्त रकम रहने से अचानक आने वाले खर्चों को संभालने में मदद मिलती है। नियमित रूप से बचत करने की आदत बनती है और बेफिजूल खर्चों पर नियंत्रण रखने में भी सहायता मिलती है।

खाते में अधिक राशि रहने पर लागू ब्याज दरों के अनुसार ब्याज की रकम भी बढ़ सकती है। हालांकि, यह ब्याज दर और खाते में मौजूद वास्तविक बैलेंस पर निर्भर करता है। कुछ बैंक खातों के साथ पात्रता के आधार पर अतिरिक्त ऑफर और सुविधाएं भी मिल सकती हैं।

AMB की कमी से कैसे बचें?

ग्राहकों को समय-समय पर मोबाइल बैंकिंग या नेट बैंकिंग के जरिए अपना बैलेंस चेक करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर नियमित ट्रांसफर की सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ पात्र खातों में स्वीप-इन सुविधा भी उपलब्ध होती है, जिसके तहत लिंक्ड एफडी से खाते में बैलेंस की कमी पूरी हो सकती है। इसलिए सेविंग अकाउंट खुलवाते समय AMB की शर्तें, लागू चार्ज और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी जरूर लें।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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