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SIP रिटर्न वाकई उतना है जितना दिख रहा है? जानें XIRR और Absolute Return के बीच का असली सच

SIP Return Myth: SIP शुरू करने पर रिटर्न तेजी से ऊपर-नीचे हो सकते हैं, इसलिए नहीं कि नुकसान हो रहा है, बल्कि इसलिए कि सालाना कैलकुलेशन शॉर्ट-टर्म मूवमेंट को बढ़ा देते हैं। यह समझना कि किस मेट्रिक्स पर और कब फोकस करना है, इन्वेस्टर्स को परफॉर्मेंस को समझने में मदद कर सकता है।

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सिप रिटर्न

SIP Return Myth: देश में मौजूदा समय में करोड़ों निवेशक म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं। हालांकि, इसके बावजूद अभी भी बहुत सारे निवेशकों के पास सही जानकारी का अभाव है। अगर म्यूचुअल फंड रिटर्न के बारे में उनसे पूछें तो बहुत सारे लोगों का जवाब आपको कन्फ्यूज कर सकता है। अधिकांश निवेशकों को नहीं पता है कि म्यूचुअल फंड कैसे काम करता है और उसके निवेश की गणना कैसे होती है? म्यूचुअल फंड में XIRR और Absolute Return के बीच क्या अंतर है? अगर आप भी उनमें शामिल हैं तो हम आपको आज सही तरीका बता रहे हैं। इससे आपको अपने निवेश पर सही रिटर्न जानने में आसानी होगी।

सबसे पहले समझते हैं, SIP कैसे काम करता है?

आपको बता दें कि SIP निवेश में, हर इंस्टॉलमेंट एक स्वतंत्र निवेश की तरह काम करता है, जिसका अपना होल्डिंग पीरियड और रिटर्न होता है। जब ऐसे कई SIP इंस्टॉलमेंट मिलते हैं, तो ओवरऑल रिटर्न कैलकुलेट करना एक सिंपल परसेंटेज गेन या लॉस से ज्यादा जटिल हो जाता है। इस जटिलता की वजह से ही एक विशेष रिटर्न मापदंड की जरूरत होती है। वह मेट्रिक XIRR है।

XIRR असल में क्या मापता है?

XIRR, या एक्सटेंडेड इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न, अलग-अलग समय पर किए गए कई कैश फ्लो पर सालाना परफॉर्मेंस कैलकुलेट करता है। क्योंकि SIP इन्वेस्टमेंट स्टैगर किए जाते हैं, इसलिए यह तरीका हर किस्तों का समय निर्धारण और अवधि दोनों को एक साथ लाने में मदद करता है ताकि एक सिंगल रिटर्न फिगर पर पहुंचा जा सके। यह फॉर्मूला तब अच्छा काम करता है जब निवेश लंबे समय तक किए गए हों, क्योंकि मार्केट मूवमेंट समय के साथ एक जैसा हो जाता है। हालांकि, जब कोई SIP कुछ ही महीने पुराना होता है, तो शॉर्ट-टर्म परफॉर्मेंस को सालाना करने से रिटर्न बढ़ या घट सकता है। इसलिए शॉर्ट टर्म में एक्सआईआरआर को देखकर रिटर्न का आकलन करना गलत हो सकता है।

एब्सोल्यूट रिटर्न एक बेहतर तरीका

अगर आप 5 से 10 साल चले सिप के रिटर्न को XIRR के जरिये आंक रहे हैं तो सही तरीका हो सकता है। वहीं अगर आप शॉर्ट टर्म यानी एक साल से कम पुराने SIP के लिए, सही रिटर्न चाहते हैं तो एब्सोल्यूट रिटर्न एक बेस्ट तरीका है। एब्सोल्यूट रिटर्न बस यह तुलना करता है कि आपने कितना निवेश किया है और पोर्टफोलियो की आज की वैल्यू क्या है? उदाहरण के लिए, अगर आपने 60,000 रुपये निवेश किए हैं और पोर्टफोलियो की आज की वैल्यू 66,000 हो जाती है, तो यह 10 प्रतिशत का फायदा दिखाता है। हालांकि, एब्सोल्यूट रिटर्न की अपनी सीमाएं हैं। यह रिटर्न पाने में लगने वाले समय को नहीं दिखाता है।

Alok Kumr
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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