Apple Awas Yojana: लगभग ढाई साल में 150,000 डायरेक्ट जॉब्स क्रिएट करने के बाद, एप्पल ईकोसिस्टम अब फैक्ट्री कर्मचारियों को घर देगा। एप्पल की कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स और सप्लायर्स फॉक्सकॉन, टाटा और सैलकॉम्प समेत कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को घर देने की योजना बना रही हैं। इन्हें प्राइवेट सेक्टर की सबसे बड़ी पहल के तहत पब्लिक-प्राइवेट स्कीम के तहत बनाया जा रहा है। योजना के तहत 78,000 से अधिक यूनिट्स का निर्माण किया जाना है, जिनमें से सबसे अधिक लगभग 58,000 यूनिट्स तमिलनाडु में होंगी।
ये भी पढ़ें -
कौन देगा घरों के लिए पैसा
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार एप्पल ईकोसिस्टम की अधिकतम हाउसिंग यूनिट्स तमिलनाडु राज्य उद्योग संवर्धन निगम (SIPCOT) बना रहा है। टाटा ग्रुप और एसपीआर इंडिया भी घर बना रहे हैं। इस योजना के तहत केंद्र सरकार 10-15% राशि देगी जबकि पैसा बाकी राज्य सरकारों और उद्यमियों से आएगा।
कब तक सौंपे जाएंगे घर
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार कंस्ट्रक्शन और घरों को सौंपने का काम 31 मार्च, 2025 तक पूरा होने की संभावना है। इस योजना का मकसद एफिशिएंसी में सुधार करना और सुरक्षा प्रदान करना है और वो भी मुख्य रूप से प्रवासी महिला कर्मचारियों को, जिनमें से अधिकतर 19-24 वर्ष के आयु वर्ग की हैं।
इनमें से एप्पल ईकोसिस्टम के अधिकतर कर्मचारी किराए पर रहते हैं और फैक्ट्री तक पहुंचने के लिए बसों में घंटों सफर करते हैं। इनमें कई कर्मचारी महिलाएं हैं, इससे सुरक्षा संबंधी समस्याएँ भी उत्पन्न होती हैं।
कौन सी कंपनी कितनी यूनिट्स का करेगी इस्तेमाल
भारत में Apple की सबसे बड़ा iPhone सप्लायर फॉक्सकॉन, जो तमिलनाडु में स्थित है, इनमें से लगभग 35,000 यूनिट्स का उपयोग करेगी। फॉक्सकॉन में इस समय 41,000 कर्मचारी काम कर रहे हैं, जिनमें से 75% महिलाएं हैं।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स 11,500 यूनिट्स और Salcomp, जो Apple के लिए पावर एडॉप्टर, एनक्लोजर और मैग्नेटिक्स बनाती है, 3,969 हाउसिंग यूनिट्स का उपयोग करेगी।
