NBFC Surrender Registration:देश की 15 प्रमुख कंपनियों ने अपने रजिस्ट्रेशन लाइसेंस सरेंडर कर दिए हैं। ये कंपनियां एनबीएफसी कारोबार से बाहर निकल गई हैं या फिर उनका एकीकरण, विलय आदि हो गया है। जिसकी वजह से उनके रजिस्ट्रेशन को सरेंडर किया गया है। ऐसे में ये कंपनियां वैध नहीं रह गईं थी। जिसके बाद आरबीआई ने इनके रजिस्ट्रेशन का सरेंडर स्वीकार कर लिया है। इसके बाद से ये कंपनियां एनबीएफसी के रूप में काम नहीं कर पाएंगी। ऐसे में कस्टमर को भी पूरी जानकारी समझ लेनी चाहिए, जिससे आने वाले समय में उनके साथ कोई धोखा न हो सके।
किन कंपनियों ने किया सरेंडर
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को कहा कि रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने वाली कंपनियों की लिस्ट में टाटा कैपिटल फाइनेंशियल सर्विसेज और रिवॉल्विंग इन्वेस्टमेंट्स सहित 15 एनबीएफसी आदि हैं।आरबीआई ने कहा कि नौ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) एकीकरण, विलय, विघटन या स्वैच्छिक रूप से सेवाएं बंद करने की वजह से वैध इकाई नहीं रह गई हैं। जबकि इनके अलावा छह एनबीएफसी ने गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान (एनबीएफआई) कारोबार से बाहर निकलने के बाद अपना पंजीकरण प्रमाणपत्र वापस कर दिया है।
देखें कंपनियों की लिस्ट
जो एनबीएफसी नौ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) एकीकरण, विलय, विघटन या स्वैच्छिक रूप से सेवाएं बंद करने की वजह से वैध इकाई नहीं रह गई हैं। उसमें टाटा कैपिटल फाइनेंशियल सर्विसेज, टाटा क्लीनटेक कैपिटल, नेपरोल इन्वेस्टमेंट्स, यूएसजी फाइनेंशियल सर्विसेज, ऊर्जा कैपिटल, वंदना डीलर्स, एबीआरएन फाइनेंस, जोधानी मैनेजमेंट और जेडीएस सिक्योरिटी शामिल हैं।
जबकि छह एनबीएफसी ने गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान (एनबीएफआई) कारोबार से बाहर निकलने के बाद अपना पंजीकरण प्रमाणपत्र वापस कर दिया है। उसमें वियान ग्रोथ कैपिटल, ड्रैप लीजिंग एंड फाइनेंस, ज्वेल स्ट्रिप्स, रिवॉल्विंग इन्वेस्टमेंट्स, अंशु लीजिंग और ए वी बी फाइनेंस हैं। इन कंपनियों को पंजीकरण प्रमाणपत्र आरबीआई की तरफ से गैर-बैंकिंग वित्तीय सेवा के लिए दिए गए थे।
