Bharat Taxi: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने सोमवार (23 फरवरी 026) को ‘भारत टैक्सी’ नाम की नई कोऑपरेटिव (सहकारी) राइड-हेलिंग सेवा की शुरुआत की। यह प्लेटफॉर्म खास तौर पर टैक्सी और ऑटो चालकों के लिए बनाया गया है, जिसमें उन्हें मुनाफे में हिस्सा और मालिकाना हक दोनों मिलेंगे। दिल्ली-एनसीआर और गुजरात के ड्राइवरों के साथ टाउन हॉल मीटिंग में शाह ने कहा कि यह सेवा ड्राइवरों की कमाई सुरक्षित करने और उन्हें कंपनी का भागीदार बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि मौजूदा कंपनियों से जब न्यूनतम बेस रेट (न्यूनतम किराया) तय करने के बारे में पूछा गया तो उनका जवाब ‘नहीं’ था। शाह ने कहा कि हम यह सुनिश्चित करेंगे कि आपकी न्यूनतम कमाई सुरक्षित रहे। इसके अलावा जो भी अतिरिक्त कमाई होगी, उसका लाभ भी आपको ही मिलेगा। साथ ही शाह ने बताया कि ड्राइवर सिर्फ 500 रुपये में एक शेयर खरीदकर इस संस्था के सह-स्वामी (co-owner) बन सकते हैं।
‘अमूल मॉडल’ पर आधारित व्यवस्था
अमित शाह ने भारत टैक्सी की तुलना देश की प्रसिद्ध डेयरी सहकारी संस्था Amul से की। उन्होंने कहा कि जैसे अमूल में किसानों और दूध उत्पादकों को मुनाफे का बड़ा हिस्सा मिलता है, उसी तरह भारत टैक्सी में भी ड्राइवरों को लाभ दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि अमूल की शुरुआत लाखों महिलाओं ने मात्र 50 रुपये के छोटे निवेश से की थी और आज वह एक बड़ी संस्था बन चुकी है। शाह ने कहा कि निजी कंपनियों में मुनाफा मालिकों को जाता है, जबकि सहकारी मॉडल में मुनाफा सदस्यों में बांटा जाता है। भारत टैक्सी भी इसी सोच के साथ बनाई गई है, जहां ड्राइवर ही इसके असली मालिक होंगे।
मुनाफे में 80% हिस्सा ड्राइवरों को
इस नई सेवा के तहत कुल मुनाफे का 80 प्रतिशत हिस्सा ड्राइवरों को उनके द्वारा तय की गई दूरी (किलोमीटर) के आधार पर दिया जाएगा। बाकी 20 प्रतिशत राशि कोऑपरेटिव फंड में जमा की जाएगी, जिससे संस्था को मजबूत किया जा सके। शाह ने बताया कि ड्राइवर सिर्फ 500 रुपये में एक शेयर खरीदकर इस संस्था के सह-स्वामी (co-owner) बन सकते हैं। जैसे-जैसे सदस्य संख्या बढ़ेगी, ड्राइवरों को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में प्रतिनिधित्व भी मिलेगा। अगर कोई फैसला ड्राइवरों के हित में नहीं होगा, तो उनका प्रतिनिधि उसका विरोध कर सकेगा और उनके अधिकारों की रक्षा करेगा।
कमीशन नहीं, पूरी कमाई ड्राइवरों की
भारत टैक्सी खुद को मौजूदा बड़ी कंपनियों से अलग बता रही है। जहां अन्य ऐप-आधारित सेवाएं ड्राइवरों से 25 से 30 प्रतिशत तक कमीशन लेती हैं, वहीं भारत टैक्सी फिलहाल कोई कमीशन नहीं काट रही है। इससे ड्राइवरों को सीधे अधिक कमाई का फायदा मिलेगा। सरकार का कहना है कि यह मॉडल ड्राइवरों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद करेगा।
विस्तार की बड़ी योजना
अमित शाह ने बताया कि अभी यह सेवा दिल्ली-एनसीआर और गुजरात के राजकोट में शुरू हुई है। आने वाले समय में इसे देश के सभी नगर निगम वाले शहरों तक पहुंचाने की योजना है। लक्ष्य है कि अगले दो वर्षों में 15 करोड़ ड्राइवरों को इससे जोड़ा जाए और तीन वर्षों के भीतर देशभर में इसका विस्तार हो। उन्होंने यह भी कहा कि मुनाफा बांटने की पूरी व्यवस्था को स्थिर होने में करीब तीन साल का समय लग सकता है। इसलिए शुरुआती दौर में ड्राइवरों से धैर्य रखने की अपील की गई है।
पायलट प्रोजेक्ट के बाद आधिकारिक शुरुआत
भारत टैक्सी की शुरुआत 5 फरवरी को आठ बड़ी सहकारी संस्थाओं के सहयोग से की गई थी। पहले दो महीने तक इसका पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया, जिसके बाद अब इसे आधिकारिक रूप से लॉन्च किया गया है। सरकार का दावा है कि यह प्लेटफॉर्म ओला, उबर और रैपिडो जैसी बड़ी कंपनियों को टक्कर देगा और ड्राइवरों के लिए एक बेहतर विकल्प साबित होगा। कुल मिलाकर, भारत टैक्सी को एक ऐसे नए मॉडल के रूप में पेश किया जा रहा है, जिसमें ड्राइवर सिर्फ कर्मचारी नहीं बल्कि भागीदार और मालिक भी होंगे। सरकार का मानना है कि यह पहल देश में सहकारिता आंदोलन को नई दिशा देगी और लाखों ड्राइवरों की आय और सम्मान दोनों को बढ़ाएगी।
