बिजनेस

हवाई सफर होगा महंगा! अब मनपसंद सीट के लिए देने होंगे एक्स्ट्रा पैसे, सरकार ने वापस लिया अपना फैसला

Free Seating Rules in Airline: हवाई यात्रियों के लिए बुरी खबर है। एयरलाइंस के भारी दबाव के बाद सरकार ने 'फ्री सीट सिलेक्शन' के अपने फैसले पर यू-टर्न ले लिया है। अब मनपसंद सीट चुनने के लिए यात्रियों को पहले की तरह ही अतिरिक्त शुल्क चुकाना होगा। जानें क्यों नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने अपना पुराना आदेश वापस लिया।

Image

Flight Seat

Free Seating Rules in Airline: हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक बुरी खबर सामने आई है। पिछले कुछ दिनों से जिस 'फ्री सीट सिलेक्शन' की चर्चा जोरों पर थी और जिससे आम यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी, उस पर अब सरकार ने यू-टर्न ले लिया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) ने अपने उस आदेश को फिलहाल के लिए स्थगित कर दिया है, जिसमें एयरलाइंस को हर फ्लाइट की कम से कम 60 फीसदी सीटें मुफ्त में आवंटित करने का निर्देश दिया गया था। इस फैसले का सीधा मतलब यह है कि अब यात्रियों को अपनी मनपसंद सीट चुनने के लिए पहले की तरह ही अतिरिक्त शुल्क या 'सीट सिलेक्शन चार्ज' देना होगा।

क्या था सरकार का वह आदेश?

दरअसल, हवाई यात्रियों की लगातार शिकायतों और बढ़ते अतिरिक्त शुल्कों को देखते हुए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया था। 17 मार्च को मंत्रालय ने डीजीसीए (DGCA) को आदेश दिया था कि एयरलाइंस को अपनी हर उड़ान में कम से कम 60% सीटें बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के उपलब्ध करानी होंगी। इस नियम को 20 अप्रैल 2026 से लागू करने की तैयारी भी पूरी कर ली गई थी। यात्रियों के बीच इस खबर से खुशी की लहर थी क्योंकि अब तक एयरलाइंस लगभग हर अच्छी सीट जैसे विंडो सीट, लेग-रूम सीट या आगे की कतार वाली सीटों के लिए भारी पैसा वसूलती रही हैं।

एयरलाइंस का दबाव और सरकार का यू-टर्न

जैसे ही सरकार ने फ्री सीटों का नियम बनाने की बात कही, एयरलाइंस और इस इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों ने इसका पुरजोर विरोध शुरू कर दिया। फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) और अकासा एयर जैसे दिग्गजों ने मंत्रालय से अपील की कि इस नियम से उनके राजस्व (Revenue) पर गहरा असर पड़ेगा। एयरलाइंस का तर्क था कि ईरान युद्ध और वैश्विक तनाव के कारण ईंधन की कीमतें पहले ही आसमान छू रही हैं और परिचालन लागत (Operating Cost) बढ़ गई है। ऐसे में अगर 'एंसीलरी रेवेन्यू' यानी अतिरिक्त सेवाओं से होने वाली कमाई पर लगाम लगाई गई, तो उन्हें फ्लाइट टिकटों के बेस फेयर (आधार मूल्य) में भारी बढ़ोतरी करनी पड़ेगी।

क्यों जरूरी है पेड सीट सिलेक्शन?

एयरलाइंस ने सरकार के सामने यह दलील भी दी कि सीट सिलेक्शन एक 'ऑप्ट-इन' सर्विस है, यानी यह केवल उन लोगों के लिए है जो अपनी पसंद को प्राथमिकता देते हैं। उनका कहना था कि अगर 60% सीटें फ्री कर दी गईं, तो पहले बुकिंग करने वाले यात्री सभी अच्छी सीटें बुक कर लेंगे। ऐसे में बुजुर्गों या परिवार के साथ यात्रा करने वाले उन लोगों के लिए अच्छी सीटें नहीं बचेंगी जो बाद में बुकिंग करते हैं। एयरलाइंस के अनुसार, पेड सीट का विकल्प इस सिस्टम में एक संतुलन बनाए रखता है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह केवल कमाई जारी रखने का एक तरीका है।

अब आगे क्या होगा?

मंत्रालय ने डीजीसीए को पत्र लिखकर पिछले आदेश को अगले निर्देश तक टालने को कहा है। सरकार का कहना है कि वे इस नए नियम के प्रभाव का फिर से गहराई से आकलन करेंगे। इसका मतलब है कि फिलहाल पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी। अगर आप वेब चेक-इन के दौरान अपनी पसंद की सीट चुनते हैं, तो आपको ₹200 से लेकर ₹1500 तक (सीट के प्रकार के आधार पर) अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है। केवल वही सीटें फ्री होंगी जिन्हें एयरलाइन रैंडमली (बिना आपकी पसंद के) आवंटित करेगी।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

और पढ़ें
End of Article