अगर आप आने वाले कुछ ही दिनों में विदेश यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खुशखबरी है। एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया (Air India) ने अपनी कुछ चुनिंदा अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों (International Flights) पर लगने वाले फ्यूल सरचार्ज (Fuel Surcharge) में भारी कटौती करने का एलान किया है। कंपनी के इस फैसले से विदेश जाने वाले आम यात्रियों की जेब पर पड़ने वाला बोझ काफी कम हो जाएगा। बदले हुए नए नियमों और दरों के लागू होने के बाद, जो लोग बिजनेस या छुट्टियों के सिलसिले में बाहर जाने का प्लान कर रहे हैं, उन्हें टिकट बुकिंग में सीधा और बड़ा आर्थिक फायदा मिलने वाला है।
आखिर क्यों लिया गया यह फैसला?
दरअसल, पिछले कुछ समय में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। कच्चे तेल के दाम कम होने का सीधा असर एटीएफ (ATF) यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (हवाई जहाज के ईंधन) की कीमतों पर पड़ा और उसकी लागत भी काफी घट गई। जेट फ्यूल सस्ता होने के तुरंत बाद एयर इंडिया ने भी इस फायदे को अपने यात्रियों तक पहुंचाने का मन बनाया और फ्यूल सरचार्ज में कटौती करने का बड़ा फैसला लिया।
नए रेट्स के मुताबिक, अब नॉर्थ अमेरिका (U.S. और कनाडा) और ऑस्ट्रेलिया जाने वाली लंबी दूरी की उड़ानों पर लगने वाले फ्यूल सरचार्ज को 280 डॉलर से घटाकर सीधे 200 डॉलर कर दिया गया है। यानी इन रूट्स पर यात्रियों को सीधे 80 डॉलर (करीब 6,500 रुपये से ज्यादा) की बचत होगी। वहीं दूसरी तरफ, यूरोप के देशों की यात्रा करने वाले लोगों के लिए भी इस शुल्क को 205 डॉलर से घटाकर अब केवल 125 डॉलर कर दिया गया है।
क्या बाकी एयरलाइंस भी टिकटें सस्ती करेंगी?
एयर इंडिया के इस कदम के बाद एविएशन इंडस्ट्री (उड्डयन क्षेत्र) में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, देश की अन्य प्राइवेट एयरलाइंस कंपनियां भी अपने फ्यूल सरचार्ज को कम करने पर गंभीरता से विचार कर रही हैं। माना जा रहा है कि इस साल की दूसरी तिमाही के अंत या तीसरी तिमाही की शुरुआत तक बाकी कंपनियां भी अपने किराए घटाने का एलान कर सकती हैं। हालांकि, अन्य एयरलाइंस का मानना है कि भले ही इंटरनेशनल मार्केट में जेट फ्यूल की कीमतें अभी घटी हैं, लेकिन वे अब भी अपने पुराने औसत स्तर से थोड़ी ज्यादा हैं। इसलिए बाकी कंपनियां थोड़ा इंतजार करना चाहती हैं ताकि यह साफ हो सके कि कीमतों में आई यह गिरावट लंबे समय तक बनी रहती है या नहीं।
यात्रियों को कैसे और कितना मिलेगा फायदा?
हवाई जहाज के टिकट की कुल कीमत कई अलग-अलग हिस्सों को मिलाकर तय होती है, जिसमें बेस फेयर (मूल किराया) के साथ-साथ फ्यूल सरचार्ज एक बड़ा हिस्सा होता है। इसलिए जब भी कोई एयरलाइन फ्यूल सरचार्ज को कम करती है, तो टिकट की कुल कीमत अपने आप नीचे आ जाती है। हालांकि, यात्रियों को यह बात भी समझनी होगी कि फ्यूल सरचार्ज घटने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि फ्लाइट टिकट हमेशा के लिए बहुत ज्यादा सस्ते हो गए हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि टिकट की अंतिम कीमत में बेस फेयर के अलावा एयरपोर्ट चार्जेस, सरकारी टैक्स, पैसेंजर सर्विस फीस और यूजर डेवलपमेंट फीस (UDF) जैसे कई अन्य शुल्क भी जुड़े होते हैं। इसके बावजूद, एयर इंडिया का यह कदम उन लोगों के लिए एक बेहतरीन मौका है जो कम बजट में विदेश यात्रा का सपना देख रहे हैं।
