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AI से नौकरियों पर बढ़ रहा खतरा, लेकिन नए अवसर भी हैं, बोले इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सचिव

AI Job Threats: केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) से सबसे अधिक खतरा उन कर्मचारियों की नौकरियों को है जो सोच-विचार और विश्लेषण से जुड़े कार्यालयी काम करते हैं। उन्होंने यह बात फिक्की के ‘एआई इंडिया’ सम्मेलन में बुधवार को कही और एआई के प्रभाव तथा नए रोजगार अवसरों पर भी चर्चा की।

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एआई से दफ्तरों में काम करने वालों की नौकरियों को सबसे अधिक खतरा: सूचना प्रौद्योगिकी सचिव (तस्वीर-istock)

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AI Job Threats: केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने कहा है कि कृत्रिम मेधा (एआई) से सबसे ज्यादा खतरा उन कर्मचारियों की नौकरियों को है जो कार्यालयों में सोच-विचार और विश्लेषण संबंधी काम करते हैं। उन्होंने यह बात उद्योग मंडल फिक्की के ‘एआई इंडिया’ सम्मेलन में बुधवार को कही। कृष्णन ने बताया कि पहले की औद्योगिक क्रांतियों में बदलाव ज्यादातर शारीरिक कार्यों और मशीनों द्वारा किए जाने वाले कामों तक सीमित थे। लेकिन एआई की स्थिति अलग है। यह पहले से सोच-समझ कर किए जाने वाले कामों को भी प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा कि पहली बार, एआई वास्तव में सोच-विचार और विश्लेषण से जुड़े कामों की जगह ले रहा है। इसलिए जिन लोगों का काम सोचने, आंकड़ों का विश्लेषण करने या रणनीति बनाने से जुड़ा है, उनकी नौकरियों पर सबसे ज्यादा खतरा है।

एआई से उत्पादकता बढ़ाने की संभावना

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक सचिव ने कहा कि नौकरियों पर खतरे के बावजूद, एआई के उत्पादकता बढ़ाने की क्षमता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से भारत जैसी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में, एआई का इस्तेमाल आर्थिक विकास और कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा कि सही योजना और रणनीति के साथ, एआई न केवल कार्यों को आसान बनाएगा बल्कि नई तकनीकी क्षमताओं और नवाचार के अवसर भी पैदा करेगा।

कौशल विकास से नए रोजगार

एस कृष्णन ने जोर देकर कहा कि एआई के कारण होने वाले विस्थापन को केवल खतरे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसके विपरीत, कौशल विकास और उन्नत प्रशिक्षण के माध्यम से नए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कई कंपनियों को यह तुरंत आकर्षक लग सकता है कि वे शुरुआती सफलताओं पर ध्यान दें, लेकिन भविष्य में आने वाली दीर्घकालिक समस्याओं की भी योजना बनाना जरूरी है। सरकार इस मामले में दोनों पहलुओं को लेकर सतर्क है। हमें न केवल मौजूदा नौकरियों पर असर का ध्यान रखना है, बल्कि नए क्षेत्रों में नए प्रकार की नौकरियों के सृजन के अवसरों को भी पहचानना है। कृष्णन ने यह भी कहा कि एआई से उत्पन्न रोजगार और कौशल विकास का काम केवल सरकार का नहीं है। इसे सफल बनाने के लिए उद्योग, शिक्षा संस्थान और अन्य हितधारक भी मिलकर काम करेंगे। उनका कहना था, यह एक सामूहिक प्रयास है। केवल एक संगठन या संस्था के प्रयास से नहीं चलेगा। सभी को इसमें योगदान देना होगा।

नौकरी संकट और भविष्य की तैयारियां

सचिव ने यह स्पष्ट किया कि एआई की वजह से कुछ नौकरियों का खत्म होना तय है, लेकिन इसके साथ ही नई नौकरियों और व्यवसायिक अवसरों का सृजन भी संभव है। इसलिए सरकार की प्राथमिकता है कि लोगों को नई तकनीकों के अनुसार तैयार किया जाए, ताकि वे भविष्य में एआई-संचालित दुनिया में भी अपने काम को सुरक्षित रख सकें। उन्होंने कहा कि शिक्षा और प्रशिक्षण को इस दिशा में और सशक्त बनाना होगा। नई नौकरियों में बदलाव को अपनाने के लिए कर्मचारियों को नवीन कौशल, तकनीकी जानकारी और विश्लेषणात्मक क्षमता विकसित करनी होगी। यह सिर्फ व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए भी जरूरी है।

एस. कृष्णन ने सम्मेलन में साफ तौर पर कहा कि एआई का असर नकारात्मक भी हो सकता है और सकारात्मक भी। इसे नियंत्रित और सही दिशा में इस्तेमाल करना जरूरी है। एआई केवल नौकरी छीनने वाला उपकरण नहीं है, बल्कि यह नए अवसर पैदा करने, उत्पादकता बढ़ाने और कौशल विकास के लिए भी महत्वपूर्ण साधन है। उनकी राय में, भविष्य में एआई के प्रभाव से निपटने के लिए सतर्क योजना, सामूहिक प्रयास और निरंतर कौशल विकास सबसे महत्वपूर्ण कदम होंगे।

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रामानुज सिंह
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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