दिल्ली के भारत मंडपम में शुक्रवार को शुरू हुए ‘राइजिंग नॉर्थ ईस्ट’ निवेशक सम्मेलन 2025 में 4.18 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों की घोषणा की गई। इस सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। इसका उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्र को वैश्विक निवेश के केंद्र के रूप में स्थापित करना और नीति निर्माताओं, निवेशकों व उद्यमियों को एक साझा मंच प्रदान करना है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया कि यह पहली बार है जब पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के लिए एक साझा निवेशक कार्यक्रम आयोजित किया गया। सम्मेलन से पहले देश के प्रमुख शहरों जैसे बेंगलुरु, मुंबई, अहमदाबाद, चेन्नई, दिल्ली, कोलकाता और इंदौर में रोड शो किए गए और उद्योग समूहों से संवाद किया गया।
हर राज्य को मिला औसतन ₹20,000 करोड़ का निवेश प्रस्ताव
सिंधिया ने बताया, “सम्मेलन के दौरान विश्वस्तरीय निवेश समझौते हुए, जिनकी कुल राशि 4.18 लाख करोड़ रुपये रही। हर राज्य को औसतन ₹20,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए।” इस आयोजन में देश-विदेश से आए 50 से अधिक देशों के राजनयिक, औद्योगिक समूहों के प्रमुख और पूर्वोत्तर राज्यों के उद्यमियों ने हिस्सा लिया।
पर्यटन, टेक्सटाइल और आईटी प्रमुख फोकस क्षेत्र
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए मुख्य क्षेत्रों में पर्यटन व आतिथ्य, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र उद्योग, हथकरघा व हस्तशिल्प, स्वास्थ्य, शिक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी शामिल किए गए हैं।
पूर्वोत्तर में विकास की नई इबारत
‘राइजिंग नॉर्थ ईस्ट’ सम्मेलन न केवल निवेश को गति देगा बल्कि पूर्वोत्तर राज्यों को आर्थिक दृष्टि से सशक्त बनाने, रोजगार सृजन और उद्यमिता को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभाएगा। सरकार का यह प्रयास क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने और संतुलित राष्ट्रीय विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
