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8th Pay Commission: जयपुर से चंडीगढ़ तक क्या कर रहा आयोग, किन मुद्दों पर हो रही बात?

8वें वेतन आयोग के सदस्य फिलहाल अलग-अलग शहरों में जाकर तमाम हितधारकों से बातचीत कर रहे हैं। आने वाले दिनों में जयपुर से चंडीगढ़ तक बैठकें होनी हैं। इस दौरान फिटमेंट फैक्टर से लेकर पेंशन रिवीजन पर बात होगी।

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8वें वेतन आयेाग की शहरों में हो रही बैठक

8th Pay Commission Latest Update: 8वां केंद्रीय वेतन आयोग इन दिनों देशभर में कर्मचारियों, पेंशनर्स, कर्मचारी संगठनों और यूनियनों से बातचीत कर रहा है। आने वाले हफ्तों में आयोग की गतिविधियां और तेज होने वाली हैं। आयोग अगस्त के आखिर से सितंबर तक जयपुर, चेन्नई, पुडुचेरी और चंडीगढ़ का दौरा करेगा। इसके अलावा मुंबई में रेलवे कर्मचारियों के कामकाज और उनकी कार्य परिस्थितियों को करीब से समझने के लिए भी एक दौरे की योजना है। हालांकि, मुंबई दौरे की तारीख अभी तय नहीं हुई है।

इन बैठकों का महत्व इसलिए ज्यादा है, क्योंकि आयोग अभी अपनी सिफारिशें तैयार करने से पहले अलग-अलग कर्मचारी वर्गों की समस्याओं और मांगों को समझने के चरण में है। फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम वेतन, भत्ते, पेंशन और कामकाजी परिस्थितियों से जुड़े मुद्दे आने वाले संवाद में प्रमुख रहने की उम्मीद है। लेकिन ध्यान रखना जरूरी है कि आयोग ने इन दौरों के लिए ऐसा कोई विस्तृत एजेंडा जारी नहीं किया है। इसलिए इन मुद्दों को कर्मचारियों और पेंशनर्स की प्रमुख मांगों तथा संभावित चर्चा के विषय के तौर पर देखना चाहिए।

कब-कहां पहुंचेगा आयोग?

8वां केंद्रीय वेतन आयोग 31 अगस्त और 1 सितंबर को जयपुर में कर्मचारी संगठनों और दूसरे हितधारकों से बातचीत करेगा। इसके बाद 7 और 8 सितंबर को चेन्नई तथा 9 सितंबर को पुडुचेरी में बैठकें होंगी। चेन्नई और पुडुचेरी के लिए आयोग ने इच्छुक संगठनों और प्रतिनिधियों से 18 अगस्त तक बैठक के लिए अनुरोध भेजने को कहा है।

शहरदौरे की तारीखआवेदन/अनुरोध की आखिरी तारीख
जयपुर31 अगस्त–1 सितंबर 2026आयोग की सूचना के अनुसार
चेन्नई7–8 सितंबर 202618 अगस्त 2026
पुडुचेरी9 सितंबर 202618 अगस्त 2026
चंडीगढ़16–18 सितंबर 202625 अगस्त 2026
मुंबईतारीख अभी तय नहीं
इसके बाद आयोग 16 से 18 सितंबर तक चंडीगढ़ में रहेगा। इस बैठक में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ से जुड़े केंद्रीय कर्मचारी, संगठन, यूनियन, पेंशनर्स और दूसरे हितधारक हिस्सा ले सकते हैं। चंडीगढ़ दौरे के लिए बैठक का अनुरोध 25 अगस्त तक जमा करना है। आयोग ने कहा है कि बैठक की जगह और विस्तृत कार्यक्रम बाद में बताया जाएगा।

बातचीत के क्या होंगे मुद्दे?

आयोग ने इन दौरों का कोई अलग-अलग एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया है। लेकिन कर्मचारियों और पेंशनर्स की ओर से अब तक उठाए गए मुद्दों को देखें तो फिटमेंट फैक्टर सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले विषयों में है। फिटमेंट फैक्टर बढ़ने का सीधा असर नए मूल वेतन के निर्धारण पर पड़ सकता है। कर्मचारी संगठन लंबे समय से बेहतर वेतन संशोधन और मौजूदा महंगाई व जीवन-यापन की लागत को ध्यान में रखकर वेतन तय करने की मांग करते रहे हैं। इसके साथ ही न्यूनतम मूल वेतन बढ़ाने का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। अलग-अलग कर्मचारी संगठनों ने अपने-अपने ज्ञापन में अलग आंकड़े और फॉर्मूले सुझाए हैं। उदाहरण के तौर पर रेलवे से जुड़े कुछ संगठनों ने न्यूनतम वेतन और अलग-अलग स्तरों के लिए अलग फिटमेंट व्यवस्था की मांग रखी है। हालांकि, अभी तक आयोग की ओर से किसी फिटमेंट फैक्टर या न्यूनतम वेतन पर कोई आधिकारिक आंकड़ा तय नहीं किया गया है।

भत्तों में बदलाव पर भी नजर

वेतन के अलावा कर्मचारियों के लिए एचआरए, परिवहन भत्ता, नाइट ड्यूटी अलाउंस, ओवरटाइम और दूसरे काम से जुड़े भत्ते भी अहम मुद्दे हैं।कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि भत्तों की समीक्षा मौजूदा महंगाई और शहरों में बढ़ती रहने की लागत को ध्यान में रखकर हो। खास तौर पर बड़े शहरों में मकान का किराया, आने-जाने का खर्च और दूसरी जरूरी सेवाओं की कीमत बढ़ने के कारण भत्तों में बदलाव की मांग की जा रही है। रेलवे के कर्मचारियों के मामले में मामला सिर्फ वेतन और भत्ते तक सीमित नहीं है। उनकी मांगों में कठिन और जोखिम वाले काम के लिए बेहतर कंपनसेशनऔर अलग तरह की व्यवस्था भी शामिल है।

पेंशनर्स की भी है बैठकों पर नजर

8वां वेतन आयोग सिर्फ मौजूदा कर्मचारियों के वेतन को लेकर काम नहीं कर रहा है। उसके दायरे में पेंशनर्स और रिटायरमेंट से जुड़े मुद्दे भी आते हैं।

आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस में वेतन, भत्तों और दूसरी सुविधाओं के साथ पेंशन से जुड़े मामलों की समीक्षा भी शामिल है। इसलिए पेंशनर्स संगठन भी अपनी मांगों और सुझावों को आयोग तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। पेंशन में संशोधन, रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा और महंगाई के असर को ध्यान में रखकर पेंशन तय करने जैसे मुद्दे आगे की चर्चा में अहम हो सकते हैं। हालांकि, इन मुद्दों पर अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों और उसके बाद सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा।

कब आएगी 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट?

आयोग को अपनी सिफारिशें देने के लिए गठन की तारीख से 18 महीने का समय दिया गया है। इसका मतलब है कि सामान्य समयसीमा मई 2027 के आसपास बनती है। लेकिन आयोग इससे पहले भी अपनी रिपोर्ट दे सकता है। अभी यह कहना संभव नहीं है कि अंतिम रिपोर्ट किस तारीख को आएगी।

सबसे अहम बात यह है कि आयोग की सिफारिशें आते ही वे अपने आप लागू नहीं हो जातीं। केंद्र सरकार सिफारिशों की समीक्षा करती है और उसके बाद इन्हें स्वीकार करने, बदलाव करने या किसी दूसरे तरीके से लागू करने पर फैसला होता है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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