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बदल गए इनकम टैक्स के 6 जरूरी फॉर्म, फाइलिंग से पहले जान लें ये नए नियम

अगर आप भी इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने जा रहे हैं तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है। दरअसल, इनकम टैक्स से जुड़े 6 फॉर्म्स में बड़ा बदलाव हुआ है, फाइलिंग से पहले जो जानना आपको बहुत जरुरी है।

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Income Tax

वित्त वर्ष 2025-26 के खत्म होने के बाद अब बारी है इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की। लेकिन इस बार यह प्रक्रिया पिछले सालों की तुलना में थोड़ी अलग होने वाली है। आयकर विभाग ने इस साल से ITR फॉर्म में 6 बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य टैक्स चोरी को रोकना और पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है। अगर आप भी अपनी कमाई पर टैक्स फाइल करने की तैयारी कर रहे हैं, तो इन नए नियमों को जान लेना बेहद जरूरी है, वरना एक छोटी सी गलती आपको इनकम टैक्स का नोटिस दिला सकती है।

बदला हुआ टैक्स रिजीम और डिफॉल्ट विकल्प

सबसे पहला और सबसे बड़ा बदलाव 'टैक्स रिजीम' के चुनाव को लेकर है। अब 'न्यू टैक्स रिजीम' (New Tax Regime) को डिफॉल्ट विकल्प बना दिया गया है। इसका मतलब है कि अगर आपने फाइलिंग के समय कोई विकल्प नहीं चुना, तो आपका टैक्स अपने आप नए रिजीम के हिसाब से कैलकुलेट हो जाएगा। यदि आप पुराने टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) का लाभ उठाना चाहते हैं और छूट (Deductions) का दावा करना चाहते हैं, तो आपको फॉर्म में इसे विशेष रूप से सिलेक्ट करना होगा। इसके लिए फॉर्म में अब एक अलग से डेडिकेटेड कॉलम दिया गया है।

कैश लेनदेन और बैंक खातों की अतिरिक्त जानकारी

आयकर विभाग अब आपके नकद लेनदेन पर कड़ी नजर रख रहा है। नए फॉर्म में अब उन लोगों को विशेष जानकारी देनी होगी जिन्होंने पूरे साल में एक निश्चित सीमा से अधिक कैश जमा किया है या निकाला है। इसके साथ ही, अब आपको अपने उन सभी बैंक खातों का विवरण देना अनिवार्य होगा जो पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान 'एक्टिव' थे। यहाँ तक कि अगर आपने कोई खाता बंद भी करवा दिया है, तो भी उसकी जानकारी फॉर्म में दर्ज करनी होगी। यह कदम काले धन और बेनामी लेनदेन पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है।

विदेशी संपत्ति और निवेश पर सख्ती

जो टैक्सपेयर्स विदेश में संपत्ति रखते हैं या विदेशी स्टॉक मार्केट में निवेश करते हैं, उनके लिए नए ITR फॉर्म में नियम और सख्त कर दिए गए हैं। अब आपको केवल विदेशी बैंक खातों की जानकारी ही नहीं देनी है, बल्कि वहां से मिलने वाले डिविडेंड (Dividend) और पूंजीगत लाभ (Capital Gains) का विस्तृत ब्यौरा देना होगा। यदि आपके पास किसी विदेशी कंपनी के 'साइनिंग अथॉरिटी' वाले अधिकार हैं, तो उसका खुलासा भी अब अनिवार्य है। जानकारी छुपाने पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल एसेट्स के लिए अलग कॉलम

डिजिटल करेंसी और एनएफटी (NFT) जैसे वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) से होने वाली कमाई को लेकर अब फॉर्म में बिल्कुल स्पष्टता ला दी गई है। नए फॉर्म में 'VDA' के लिए एक अलग शेड्यूल जोड़ा गया है। यहाँ आपको हर एक ट्रांजैक्शन की तारीख, खरीद की कीमत और बिक्री की कीमत की जानकारी देनी होगी। याद रहे कि क्रिप्टो से होने वाली कमाई पर 30% फ्लैट टैक्स लगता है, और नए फॉर्म में इसकी गणना करना अब पहले से कहीं अधिक विस्तृत हो गया है।

डिडक्शन और दान (Donations) का वेरिफिकेशन

अगर आप धारा 80G के तहत दान पर टैक्स छूट का दावा करते हैं, तो अब आपको केवल रसीद से काम नहीं चलेगा। नए फॉर्म में अब 'रसीद नंबर' के साथ-साथ उस संस्था का 'यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर' (URN) भी भरना होगा जिसे आपने दान दिया है। इसके बिना आपकी छूट अमान्य कर दी जाएगी। इसी तरह, होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली छूट के लिए अब बैंक के पैन कार्ड या आधार नंबर की जानकारी देना भी अनिवार्य किया जा सकता है, ताकि दावों की सटीकता की जांच की जा सके।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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