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BSE में 50% शेयर चाट रहे धूल, 1 साल के निचले स्तर पर कीमत, ऑल-टाइम लो पर 445 स्टॉक

शेयर बाजार में तबाही की खाई बढ़ती जा रही है। BSE पर 4 हजार से ज्यादा कंपनियां लिस्टेड हैं। इनमें से 2000 से ज्यादा के शेयर 52 वीक लो यानी एक साल के निचले स्तर पर आ गए हैं। जबकि, 445 स्टॉक्स ऑल टाइम लो पर हैं।

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BSE पर 4000 हजार से ज्यादा कंपनियां लिस्टेड हैं

BSE 52 Week Low: भारतीय शेयर बाजार में जारी बिकवाली अब गहराई तक पहुंच चुकी है। BSE पर लिस्टेड 50% से ज्यादा कंपनियां अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गई हैं, जो यह संकेत देता है कि गिरावट अब सिर्फ इंडेक्स तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे बाजार में फैल चुकी है। BSE के आंकड़ों के मुताबिक, एक्सचेंज पर लिस्टेड 4,000 से ज्यादा शेयरों में से 2,200 से अधिक स्टॉक्स अपने 52-हफ्ते के लो पर ट्रेड कर रहे हैं। इनमें सैकड़ों शेयर ऐसे भी हैं जो अपने ऑल-टाइम लो तक फिसल चुके हैं। यह स्थिति बाजार में व्यापक कमजोरी का स्पष्ट संकेत देती है, जहां निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ता दिख रहा है।

सिर्फ स्मॉलकैप नहीं, बड़े शेयर भी दबाव में

इस गिरावट की खास बात यह है कि यह केवल स्मॉलकैप या कमजोर कंपनियों तक सीमित नहीं है। बीएसई के A और B ग्रुप के कई शेयर भी दबाव में हैं, जो आमतौर पर मजबूत माने जाते हैं। इससे यह साफ होता है कि बाजार में बिकवाली व्यापक स्तर पर हो रही है और निवेशक हर सेगमेंट में जोखिम कम कर रहे हैं।

पैरामीटरआंकड़े
कुल BSE लिस्टेड कंपनियां~4,270
52-हफ्ते के निचले स्तर पर शेयर~2,234
प्रतिशत50% से ज्यादा
ऑल-टाइम लो पर शेयर~445
A और B ग्रुप में शामिल शेयर~1,000
मार्केट ट्रेंडBroad-based selloff

ग्लोबल तनाव और तेल की कीमतें बनी बड़ी वजह

बाजार पर दबाव की सबसे बड़ी वजह वैश्विक अनिश्चितता है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे भारत जैसे आयातक देश पर दबाव बढ़ा है। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की कमजोरी को और गहरा कर दिया है।

सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट का असर ब्रॉड मार्केट पर

प्रमुख सूचकांकों में आई गिरावट का असर अब ब्रॉड मार्केट पर साफ दिख रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी अपने हालिया उच्च स्तर से काफी नीचे आ चुके हैं, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में गिरावट और ज्यादा तेज रही है। इससे निवेशकों की संपत्ति में भी बड़ा नुकसान देखने को मिला है।

निवेशकों के लिए संकेत क्या हैं

मौजूदा हालात बाजार में घबराहट का संकेत जरूर देते हैं, लेकिन इसे पूरी तरह नकारात्मक नहीं माना जा सकता। इस तरह की व्यापक गिरावट के दौरान कई मजबूत कंपनियों के शेयर भी आकर्षक वैल्यूएशन पर आ जाते हैं। हालांकि, हर गिरा हुआ शेयर निवेश का मौका नहीं होता, इसलिए निवेश से पहले कंपनी के फंडामेंटल और सेक्टर की स्थिति को समझना जरूरी है। शेयर बाजार में यह गिरावट केवल एक सामान्य करेक्शन नहीं, बल्कि व्यापक दबाव की स्थिति को दर्शाती है। ऐसे माहौल में सतर्क रणनीति और डेटा-आधारित निवेश ही जोखिम को कम कर सकता है।

डिस्क्लेमर: TimesNow Hindi किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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