अगर आप भी टर्म इंश्योरेंस लेने की सोच रहे हैं तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है। जब भी हम टर्म इंश्योरेंस (जीवन बीमा) खरीदते हैं तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि कवर कितना होना चाहिए। अगर कवर कम लिया तो आपके न रहने पर परिवार को मुश्किल हो सकती है और अगर बहुत ज्यादा लिया तो प्रीमियम अनावश्यक रूप से बढ़ जाएगा। सही कवर तय करने के लिए कुछ आसान तरीके हैं। इनमें से सबसे लोकप्रिय है 20X इंश्योरेंस रूल। आइए इसे और अन्य तरीकों को आसान भाषा में समझते हैं।
1. ह्यूमन लाइफ वैल्यू (HLV)
इसमें यह देखा जाता है कि आप अपने पूरे कामकाजी जीवन में कितनी इनकम कमा सकते हैं। फिर उसमें से पर्सनल खर्च घटाकर यह पता लगाया जाता है कि परिवार को आप सालाना कितनी मदद दे रहे हैं। इसी रकम को महंगाई को ध्यान में रखते हुए आज के हिसाब से कैलकुलेट किया जाता है।
इसको उदहारण समझने की कोशिश करते हैं, मान लीजिए राम की उम्र 40 साल है और सालाना इनकम 5 लाख है। वह 1.3 लाख खुद पर खर्च करता है और 3.7 लाख परिवार पर। तो राम की "इकोनॉमिक वैल्यू" 3.7 लाख सालाना हुई। यानी टर्म इंश्योरेंस कवर ऐसा होना चाहिए कि राम के न रहने पर भी परिवार को हर साल उतनी ही रकम मिलती रहे।
2. इनकम रिप्लेसमेंट रूल
यह सबसे सीधा तरीका है। इसमें आपकी वार्षिक आय को उन सालों से गुणा किया जाता है, जितने साल बाद आप रिटायर होने वाले हैं। अगर आपकी उम्र 30 साल है, सालाना आय 4 लाख है और आप 60 पर रिटायर होंगे, तो आपको 30 साल का कवर चाहिए। यानी बीमा कवर होना चाहिए:
4,00,000 x 30 = 1.2 करोड़
3. अंडरराइटर का थंब रूल (20X रूल)
इस नियम के अनुसार, बीमा कवर आपकी वार्षिक आय का 20 गुना होना चाहिए। अगर आपकी उम्र 20–30 साल है, तो आपको सालाना आय का 25 गुना तक कवर लेना चाहिए। 40–50 की उम्र में यह कवर सालाना आय का लगभग 20 गुना होना चाहिए। अगर आपकी वार्षिक आय 10 लाख है और उम्र 35 साल है, तो आपको लगभग 2 करोड़ का टर्म इंश्योरेंस कवर लेना चाहिए।
4. जरूरत के आधार पर कवर तय करना
महंगाई को देखते हुए आपको ऊंचा कवर लेना चाहिए, ताकि आपके परिवार की लाइफस्टाइल बनी रहे। इसमें आपकी इनकम, कर्ज, लोन, बच्चों की पढ़ाई, शादी और अन्य वित्तीय लक्ष्य भी शामिल करने चाहिए।
लाइफ इंश्योरेंस कवर तय करने के कई तरीके हैं, लेकिन 20X रूल एक आसान फॉर्मूला देता है। यानी आपकी वार्षिक आय का करीब 20 गुना कवर आपके परिवार के लिए सुरक्षित माना जाता है। फिर भी, सही आंकड़ा आपकी व्यक्तिगत जरूरत और वित्तीय स्थिति देखकर ही तय करना चाहिए।
