नई कार खरीदते समय अधिकतर लोग इंजन, माइलेज और फीचर्स पर ध्यान देते हैं। लेकिन एक सवाल यह भी कि टर्बो इंजन (Turbo Engine) बेहतर है या नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन (Naturally Aspirated Engine)? असल में दोनों तरह के इंजन अलग-अलग तकनीक पर काम करते हैं और दोनों के अपने फायदे और सीमाएं हैं। अगर आप भी नई कार खरीदने की सोच रहे हैं तो पहले इन दोनों इंजन के बीच का अंतर समझना जरूरी है। आइए समझते हैं इन दोनों तरह के इंजन में अंतर-
क्या होता है नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन?
नैचुरली एस्पिरेटेड (NA) इंजन में हवा नॉर्मल एट्मॉस्फेरिक प्रेसर (Atmospheric Pressure) के जरिए इंजन के अंदर जाती है। इसमें किसी अतिरिक्त टर्बोचार्जर या सुपरचार्जर का इस्तेमाल नहीं किया जाता। यही वजह है कि इसकी बनावट कुछ सरल होती है। इस तरह के इंजन लंबे समय से कारों में इस्तेमाल किए जा रहे हैं और इन्हें भरोसेमंद माना जाता है। Hyundai, Maruti Suzuki, Honda और Toyota जैसी कई कंपनियां अभी भी अपनी कई कारों में NA इंजन देती हैं।
टर्बो इंजन कैसे करता है काम?
अब समझते हैं कि गाड़ियों में टर्बो इंजन किस तरह काम करता है। दरअसल, टर्बो इंजन में एक टर्बोचार्जर लगाया जाता है, जो इंजन से निकलने वाली एग्जॉस्ट गैसों की मदद से ज्यादा हवा इंजन के अंदर भेजता है। अधिक हवा मिलने पर ज्यादा ईंधन जलता है और इंजन अधिक पावर और टॉर्क पैदा करता है। यही कारण है कि कम क्षमता (जैसे 1.0 या 1.2 लीटर) का टर्बो इंजन भी कई बार बड़े NA इंजन जितनी या उससे अधिक परफॉर्मेंस दे देता है।
टर्बो इंजन के फायदे
अगर आपको तेज एक्सेलेरेशन और दमदार ड्राइविंग पसंद है तो टर्बो इंजन बेहतर विकल्प हो सकता है। हाईवे पर ओवरटेक करना आसान होता है और कम RPM (Revolutions Per Minute) पर भी अच्छा टॉर्क मिलता है। पहाड़ी इलाकों में भी इसकी परफॉर्मेंस बेहतर महसूस होती है। इसके अलावा छोटे इंजन से ज्यादा पावर मिलने के कारण कई कंपनियां अब टर्बो इंजन को प्राथमिकता दे रही हैं।
नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन के फायदे
NA इंजन की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्मूद और भरोसेमंद परफॉर्मेंस है। इसकी मैकेनिकल बनावट सरल होने के कारण रखरखाव आसान और कम खर्चीला होता है। शहर में रोजाना इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए यह इंजन काफी आरामदायक माना जाता है। इसके अलावा लंबे समय तक इस्तेमाल में इसकी विश्वसनीयता भी अच्छी रहती है।
