केंद्र सरकार ने वाहनों से जुड़े नियमों में बदलाव की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी इस मसौदे में ईंधन और उत्सर्जन मानकों से जुड़े कई महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। सरकार ने इस पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।
30 दिन में मांगे गए सुझाव और आपत्तियां
जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, यह मसौदा 27 अप्रैल 2026 को पब्लिश किया गया है। इच्छुक व्यक्ति इस पर अपने सुझाव और आपत्तियां निर्धारित समय सीमा के भीतर मंत्रालय को भेज सकते हैं। इसके बाद केंद्र सरकार इन सुझावों पर विचार कर अंतिम नियम लागू करेगी। ड्राफ्ट में सबसे अहम बदलाव ईंधन के तकनीकी नामों और उनके मिश्रण (ब्लेंडिंग) से जुड़े हैं। सरकार ने नए और अधिक पर्यावरण अनुकूल ईंधनों को बढ़ावा देने के लिए इन नामों को अपडेट करने का प्रस्ताव रखा है।
एथेनॉल क्यों है जरुरी?
सरकार का स्पष्ट कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम से देश को जबरदस्त आर्थिक लाभ हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक, इससे हर साल करीब 4.5 करोड़ बैरल कच्चे तेल की बचत हो रही है, जिससे अब तक लगभग 1.65 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा के खर्च में कमी आई है।
वाहनों की अनुकूलता पर बात करें तो, 2012 से मार्च 2023 के बीच निर्मित अधिकांश कारें E10 (10% एथेनॉल) के मानक पर तैयार की गई थीं। हालांकि, अप्रैल 2023 के बाद आने वाली नई गाड़ियाँ E20 (20% एथेनॉल) के अनुसार बनाई गई हैं, जो 20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर बिना किसी परेशानी के चल सकती हैं।
हाइड्रोजन ईंधन में संशोधन
हाइड्रोजन से जुड़े मानकों में बदलाव करते हुए ‘Hydrogen+CN’ की जगह ‘Hydrogen+CNG’ शब्द का उपयोग करने का प्रस्ताव है। यह बदलाव तकनीकी स्पष्टता और बेहतर मानकीकरण के उद्देश्य से किया गया है।
पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा
पेट्रोल (Gasoline) के लिए मौजूदा ‘E10’ के साथ अब ‘E20’ (20% एथेनॉल मिश्रण) को शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है। यह कदम भारत में एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने और पेट्रोल पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एथेनॉल के उच्च स्तर को मिली जगह
ड्राफ्ट नियमों में E85 (85% एथेनॉल) और E100 (100% एथेनॉल) जैसे उच्च स्तर के एथेनॉल मिश्रणों को भी शामिल करने का प्रस्ताव है। इससे वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
बायो-डीजल में बड़ा बदलाव
बायोडीजल के लिए भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। अभी तक ‘B10’ (10% बायोडीजल मिश्रण) का उपयोग होता है, जिसे बढ़ाकर ‘B100’ (100% बायोडीजल) तक ले जाने की योजना है। यह पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में अहम कदम हो सकता है।
इन प्रस्तावित बदलावों से साफ है कि सरकार स्वच्छ ईंधन, कम प्रदूषण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर जोर दे रही है। यदि ये नियम लागू होते हैं, तो भारत में ग्रीन फ्यूल्स के उपयोग को बड़ा बढ़ावा मिल सकता है। फिलहाल यह एक ड्राफ्ट है और अंतिम नियम लागू होने से पहले इसमें बदलाव संभव हैं। सरकार द्वारा प्राप्त सुझावों और आपत्तियों के आधार पर ही अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी।
