देश में सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने और सड़क दुर्घटना पीड़ितों को जल्द राहत पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ऐसे प्रस्तावों पर काम कर रहा है, जिनके तहत बार-बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों को ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License) रिन्यू करवाने से पहले दोबारा ड्राइविंग टेस्ट (Driving Test) देना पड़ सकता है। इसके साथ ही सड़क दुर्घटना में घायल लोगों और मृतकों के परिजनों को अंतिम फैसले से पहले अंतरिम मुआवजा देने की व्यवस्था भी लागू की जा सकती है।
दोबारा देना पड़ सकता है ड्राइविंग टेस्ट
प्रस्ताव के अनुसार, जिन वाहन चालकों के नाम पर ट्रैफिक चालान का लंबा रिकॉर्ड होगा और जिन्होंने बार-बार नियमों का उल्लंघन किया होगा, उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यू करवाते समय अतिरिक्त जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में व्यक्ति को दोबारा ड्राइविंग टेस्ट देना अनिवार्य किया जा सकता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह सुरक्षित तरीके से गाड़ी चला सके। सरकार का मानना है कि इससे लापरवाही से की जाने वाली ड्राइविंग पर अंकुश लगेगा और सड़क हादसों की संख्या कम करने में मदद मिलेगी।
सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मिलेगी आर्थिक सहायता
सरकार का दूसरा बड़ा प्रस्ताव सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने से जुड़ा है। वर्तमान व्यवस्था में कई मामलों में पीड़ितों या उनके परिवारों को मुआवजा मिलने में लंबा समय लग जाता है, क्योंकि अंतिम फैसला आने तक इंतजार करना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने पर मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) को यह अधिकार दिया जा सकता है कि वह अंतिम निर्णय आने से पहले ही पीड़ितों या उनके परिजनों को अंतरिम मुआवजा प्रदान कर सके। इससे दुर्घटना के बाद इलाज और अन्य जरूरी खर्चों के लिए तत्काल आर्थिक मदद मिल सकेगी।
नियमों का पालन करने की बढ़ेगी जिम्मेदारी
ट्रैफिक नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वालों के लिए दोबारा ड्राइविंग टेस्ट का प्रस्ताव भी सड़क सुरक्षा की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे वाहन चालकों में नियमों का पालन करने की जिम्मेदारी बढ़ेगी और लापरवाही से वाहन चलाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
हालांकि, ये प्रस्ताव अभी विचाराधीन हैं और इन्हें लागू करने से पहले आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अंतिम नियम अधिसूचित होने के बाद इनके लागू होने की समयसीमा और विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। अगर ये बदलाव लागू होते हैं, तो भारत की सड़क सुरक्षा व्यवस्था में यह एक महत्वपूर्ण सुधार साबित हो सकता है।
