Car Loan Hidden Charges: धनतेरस (Dhanteras 2026) के मौके पर नई गाड़ी की खरीदारी को शुभ माना जाता है। इस दौरान ऑटो कंपनियां ग्राहकों को डिस्काउंट, एक्सचेंज ऑफर और आसान फाइनेंसिंग की सुविधा देती हैं। ऐसे में लोग कम डाउन पेमेंट और आकर्षक ईएमआई (EMI) देखकर कार खरीदने का फैसला कर लेते हैं। हालांकि, कार लोन (Car Loan) लेते समय केवल ब्याज दर और मंथली ईएमआई देखना काफी नहीं है। लोन से जुड़े कुछ अतिरिक्त चार्ज भी होते हैं, जो आपकी कार की कुल लागत बढ़ा सकते हैं। इसलिए लोन एग्रीमेंट पर साइन करने से पहले इन पांच खर्चों को समझना जरूरी है-
प्रोसेसिंग और डॉक्यूमेंटेशन फीस
कार लोन के लिए आवेदन करते समय बैंक या फाइनेंस कंपनी प्रोसेसिंग फीस वसूलती है। यह फीस एक तय रकम या लोन की राशि के प्रतिशत के आधार पर हो सकती है। इसके अलावा डॉक्यूमेंटेशन चार्ज और उस पर लागू जीएसटी भी देना पड़ सकता है। उदाहरण के लिए अगर आप 10 लाख रुपये का कार लोन लेते हैं और प्रोसेसिंग फीस 1 प्रतिशत है तो आपको 10,000 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। इसलिए लोन फाइनल करने से पहले सभी चार्ज की जानकारी जरूर लें।
प्रीपेमेंट और फोरक्लोजर चार्ज
अगर आप लोन की अवधि पूरी होने से पहले ही बची हुई रकम चुकाना चाहते हैं तो बैंक कुछ शर्तें लागू कर सकता है। इसे प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर कहा जाता है। कुछ लोन में आंशिक भुगतान की सुविधा होती है, जबकि कुछ में पूरी रकम समय से पहले चुकाने पर चार्ज लग सकता है। इसलिए लोन लेने से पहले यह जरूर पता करें कि समय से पहले पेमेंट करने पर कितना शुल्क देना होगा।
इंश्योरेंस और दूसरे ऐड-ऑन खर्च
कार खरीदते समय मोटर इंश्योरेंस, एक्सटेंडेड वारंटी और लोन प्रोटेक्शन कवर जैसे विकल्प दिए जा सकते हैं। ये सुविधाएं काम की साबित हो सकती हैं, लेकिन हर ऐड-ऑन जरूरी नहीं होता। यह भी चेक करें कि इनकी कीमत लोन में जोड़ी जा रही है या नहीं। अगर 50,000 रुपये के अतिरिक्त प्रोडक्ट लोन में शामिल किए जाते हैं, तो इस रकम पर भी ब्याज देना होगा।
EMI में देरी और चेक बाउंस चार्ज
अगर किसी महीने EMI समय पर जमा नहीं होती, तो बैंक पेनल चार्ज लगा सकता है। ऑटो-डेबिट या चेक फेल होने पर भी अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। बार-बार पेमेंट में देरी से क्रेडिट स्कोर भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए लोन लेने से पहले लेट पेमेंट और चेक बाउंस से जुड़े नियम समझ लें।
लंबी लोन अवधि का वास्तविक खर्च
लंबी अवधि का लोन लेने पर EMI कम हो जाती है, लेकिन कुल ब्याज बढ़ सकता है। उदाहरण के लिए 9 प्रतिशत सालाना ब्याज दर पर 10 लाख रुपये का लोन पांच साल की बजाय सात साल के लिए लेने पर मंथली ईएमआई कम होगी, लेकिन कुल ब्याज ज्यादा देना पड़ेगा।
