डॉक्टर्स के अनुसार, यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है कि हर ब्राउन ब्रेड सफेद ब्रेड से बेहतर होती है। ब्रेड का पोषण उसके रंग पर नहीं, उसे बनाने में इस्तेमाल होने वाले आटे के प्रकार और बनाने के तरीके पर निर्भर करता है।
असली होल वीट ब्रेड स्वास्थ्य के लिए एक अच्छा विकल्प है क्योंकि इसमें गेहूं के चोकर, जर्म और एंडोस्पर्म के गुण सुरक्षित रहते हैं। इसमें रिफाइंड आटे की तुलना में फाइबर, विटामिन बी और जरूरी खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
होल ग्रेन ब्रेड में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है, लंबे समय तक पेट भरा होने का अहसास कराता है और ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। नियमित रूप से होल ग्रेन ब्रेड का सेवन करने से हृदय और मेटाबोलिक हेल्थ में भी सुधार हो सकता है।
बाजार में मिलने वाली हर ब्राउन ब्रेड असल में होल वीट से नहीं बनती है। कई ब्रांड्स रिफाइंड मैदे में कैरेमेल या मोलासेस (शीरा) जैसे कलरिंग एजेंट मिलाकर उसे भूरा रंग दे देते हैं। दिखने में हेल्दी लगने वाली इन ब्रेड्स का पोषण स्तर भी लगभग सफेद ब्रेड जैसा ही होता है।
सफेद ब्रेड आमतौर पर परिष्कृत गेहूं के आटे से बनाई जाती है, जिससे चोकर और जर्म का अधिकांश हिस्सा हटा दिया जाता है। इसमें फाइबर कम होता है और यह ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकती है। हालांकि, संतुलित आहार और सही मात्रा में सेवन करने पर यह पूरी तरह हानिकारक नहीं होती है।
डॉक्टर्स की सलाह है कि केवल विज्ञापनों या ब्रेड के रंग पर भरोसा करने के बजाय सामग्री की सूची को ध्यान से पढ़ना चाहिए। यह सुनिश्चित करें कि उसमें मुख्य घटक के रूप में 'होल वीट फ्लोर' या 'होल ग्रेन फ्लोर' लिखा हो और उसमें अतिरिक्त चीनी या सोडियम की मात्रा कम हो।
डायबिटीज, इंसुलिन रेजिस्टेंस या अन्य मेटाबोलिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए उच्च फाइबर वाली होल ग्रेन ब्रेड बेहतर विकल्प हो सकती है। हालांकि, कार्बोहाइड्रेट की कुल मात्रा और पोर्शन साइज का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, और ग्लूटेन से एलर्जी वाले लोगों को इससे बचना चाहिए।