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कबाड़ नहीं, शानदार बाइक चुनें! इन 5 सीक्रेट टिप्स से पहचानें Second Hand Bike की असली कंडीशन

Second Hand Bike Buying Guide: अगर आप भी अपनी जरूरत को देखते हुए सेकंड हैंड बाइक घर लाने का विचार बना रहे हैं तो यह आपके लिए समझदारी भरा फैसला हो सकता है, लेकिन सही जांच के बिना ऐसा करना ठीक नहीं होगा। इंजन, दस्तावेज, ओडोमीटर, ब्रेक और एक्सीडेंट हिस्ट्री की अच्छी तरह जांच करने से ही आप सुरक्षित और फायदे का सौदा कर सकते हैं।

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सेकंड हैंड बाइक खरीदने से पहले जरूर करें ये काम (Photo: AI Generated)

Second Hand Bike Buying Guide: बाइक आज के समय में एक बड़ी जरूरत बन गई है। हालांकि, इस जरूरत को पूरा कर पाना बहुत से लोगों के लिए मुश्किल भी होता है। बाइक की जरूरत महसूस हो रही है और नई की जगह सेकंड हैंड बाइक घर लाने का विचार बना रहे हैं तो ये जानकारी आपके काम की हो सकती है। नई बाइक की तुलना में सेकंड हैंड बाइक कम बजट में मिल जाती है इसलिए यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है। लेकिन आपको यह भी समझने की जरूरत है कि अगर बिना जांच-पड़ताल के बाइक खरीद ली जाए तो बाद में भारी खर्च उठाना पड़ सकता है। इसलिए पुरानी बाइक खरीदने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों की जांच करना बेहद जरूरी है। इस आर्टिकल में आपको इसी बारे में जानकारी दे रहे हैं-

इंजन की हालत और आवाज

बाइक का इंजन उसकी जान होता है। सेकंड हैंड बाइक ले रहे हैं तो इसे स्टार्ट कर इंजन की आवाज ध्यान से सुनें। अगर आवाज असामान्य, खड़खड़ाहट वाली या ज्यादा वाइब्रेशन वाली हो, तो सावधान रहें। एक्सिलरेटर देने पर स्मूद पिकअप होना चाहिए। धुआं ज्यादा निकल रहा हो तो यह भी इंजन की समस्या का संकेत हो सकता है।

डॉक्यूमेंट्स और RC की जांच

बाइक खरीदने से पहले उसके सभी कागजात जरूर देखें। सेकंड हैंड बाइक को लेकर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC), इंश्योरेंस, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट (PUC) और सर्विस रिकॉर्ड चेक करें। यह भी सुनिश्चित करें कि चेसिस नंबर और इंजन नंबर दस्तावेज से मेल खाते हों। किसी भी तरह की कानूनी परेशानी से बचने के लिए यह कदम बेहद जरूरी है।

ओडोमीटर रीडिंग

ओडोमीटर से पता चलता है कि बाइक कितनी चली है। हालांकि कुछ लोग रीडिंग से छेड़छाड़ भी कर देते हैं, इसलिए केवल नंबर पर भरोसा न करें। बाइक की कंडीशन और सर्विस हिस्ट्री देखकर अंदाजा लगाने की कोशिश करें कि रीडिंग सही है या नहीं।

टायर, ब्रेक और सस्पेंशन

टायर घिसे हुए हों तो जल्द बदलने पड़ सकते हैं, जिससे अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा। ब्रेक लगाकर देखें कि वे सही काम कर रहे हैं या नहीं। सस्पेंशन दबाकर चेक करें कि बाइक संतुलित है या नहीं। टेस्ट राइड जरूर लें, इससे असली स्थिति समझ में आ जाती है।

एक्सीडेंट या डैमेज का इतिहास

बाइक के बॉडी पार्ट्स, पेंट और फ्रेम को ध्यान से देखें। कहीं वेल्डिंग या रिपेयर के निशान तो नहीं हैं? अगर बाइक का एक्सीडेंट हुआ हो, तो फ्रेम कमजोर हो सकता है। ऐसी बाइक भविष्य में परेशानी दे सकती है।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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