PM Rashtriya Krishi Vikas Yojana, Krishonnati Yojana: केंद्रीय कैबिनेट ने किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा में सुधार के लिए दो स्कीम्स पीएम-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) और कृषोन्ति योजना को मंजूरी दी है, जिसके लिए 1,01,321 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसने भारत को तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए खाद्य तेल-तिलहन (NMEO-Oilseeds) पर राष्ट्रीय मिशन को भी मंजूरी दी है, जिसके लिए 10,103 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि PM-RKVY के तहत, मिट्टी हेल्थ और उर्वरता, वर्षा क्षेत्र विकास, प्रति बूंद अधिक फसल, फसल विविधीकरण और कृषि मशीनीकरण जैसे विभिन्न उपायों के जरिये कृषि उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
दोनों योजनाओं पर खर्च होंगे इतने रुपये
सरकार ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि इन दोनों कृषि योजनाओं पर कुल मिलाकर 1,01,321.61 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें से RKVY के लिए 57,074.72 करोड़ रुपये और कृषोन्नति योजना के लिए 44,246.89 करोड़ रुपये चिह्नित किए गए हैं। इन दोनों योजनाओं में 18 मौजूदा कृषि योजनाओं को शामिल किया गया है। केंद्र सरकार इन योजनाओं को राज्य सरकारों के माध्यम से क्रियान्वित करती है
कृषि और किसानों के प्रति सरकार की प्राथमिकता
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘एक्स’ पर कहा कि यह निर्णय कृषि और किसानों के प्रति सरकार की प्राथमिकता को दर्शाता है। आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस पहल से यह सुनिश्चित होता है कि सभी मौजूदा योजनाएं जारी रखी जा रही हैं। जहां भी किसानों के कल्याण के लिए किसी क्षेत्र को बढ़ावा देना जरूरी समझा गया वहां योजना को मिशन मोड में लिया गया है। कृषोन्नति योजना के एक घटक ‘पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट’ (MOVCDNER) योजना में ‘विस्तृत परियोजना रिपोर्ट’ घटक को जोड़ा गया है। इससे पूर्वोत्तर राज्यों को महत्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान करने के लिए लचीलापन मिलेगा। सरकार ने कहा कि इन कृषि योजनाओं को युक्तिसंगत बनाने से राज्य सरकारें कृषि क्षेत्र के लिए अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप एक व्यापक रणनीतिक योजना तैयार करने में सक्षम होंगी।
फसलों के पैदावार पर ध्यान केंद्रित
रणनीतिक दस्तावेज न केवल फसलों के उत्पादन और पैदावार पर ध्यान केंद्रित करता है बल्कि जलवायु-अनुकूल कृषि और कृषि उत्पादों के लिए मूल्य शृंखला दृष्टिकोण के विकास के उभरते मुद्दों का भी उल्लेख करता है। सरकार ने कहा कि दोहराव से बचने, सम्मिलन को सुनिश्चित करने और राज्यों को लचीलापन देने के लिए विभिन्न योजनाओं को युक्तिसंगत बनाया गया है। इससे कृषि की उभरती चुनौतियों- पोषण सुरक्षा, टिकाऊपन, जलवायु लचीलापन, मूल्य शृंखला विकास और निजी क्षेत्र की भागीदारी पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी।
PM-RKVY में राज्य सरकारों को अपने राज्य की विशिष्ट जरूरतों के आधार पर एक से दूसरे घटक में धन आवंटित करने का लचीलापन दिया जाएगा। PM-RKVY में मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, वर्षा-सिंचित क्षेत्र विकास, कृषि वानिकी, परंपरागत कृषि विकास योजना, कृषि मशीनीकरण, प्रति बूंद अधिक फसल, फसल विविधीकरण कार्यक्रम, RKVY डीपीआर घटक और कृषि स्टार्टअप के लिए उत्प्रेरक निधि शामिल है।
