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इजराइल ने ईरान के इस्फहान शहर पर ही क्यों किया काउंटर अटैक? जंग से पहले क्या है नेतन्याहू का प्लान

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 19, 2024, 01:15 PM IST

Israel launches strike against Iran: इजराइल के ताजा हमले के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव की स्थिति है और दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ने की आशंका बढ़ गई गई है। हालांकि, सबसे मुख्य सवाल यह है कि ईरान ने अपने हमले के लिए इस्फहान शहर को ही क्यों चुना? और ईरान से सीधे भिड़ने से पहले इजराइल कौन सी रणनीति अपना रहा है? आइए जानते हैं...

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इजराइल-ईरान संघर्ष

Photo : Times Now Digital

Israel Iran War: इजराइल ने ईरान पर पूरे एक सप्ताह बाद काउंटर अटैक किया है। इजराइली सेना की ओर ईरान के इस्फहान शहर को निशाना बनाया गया है। यहां कई मिसाइलें व ड्रोन अटैक किए गए हैं। बताया गया है कि इस्फ़हान के पूरब और इस्फ़हान अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास तीन विस्फोट हुए हैं, जिसके बाद ईरानी न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, आसमान में ईरानी हवाई सुरक्षा सक्रिय कर दी गई है।

इस ताजा हमले के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है और दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ने की आशंका बढ़ गई गई है। हालांकि, सबसे मुख्य सवाल यह है कि ईरान ने अपने हमले के लिए इस्फहान शहर को ही क्यों चुना? और ईरान से सीधे भिड़ने से पहले इजराइल कौन सी रणनीति अपना रहा है? आइए जानते हैं...

तीसरा सबसे आबादी शहर

इजराइल ने ईरान के जिस इस्फहान शहर पर हमला किया है वह तीसरा सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर है और यहां की जनसंख्या करीब 22 लाख है। यह शहर सांस्कृति रूप से भी काफी समृद्ध है और फारसी-इस्लामी वास्तुकला, भव्य बुलेवार्ड, ढके हुए पुलों, महलों, टाइल वाली मस्जिदों और मीनारों के लिए प्रसिद्ध है। इस्फ़हान में कई ऐतिहासिक इमारतें, स्मारक, पेंटिंग और कलाकृतियां भी हैं।

इस्फहान का रणनीतिक पहलू

ईरान के लिए इस्फहान शहर रणनीतिक तौर पर काफी महत्वपूर्ण है। तेहरान से करीब 350 किमी दूर बसे इस शहर में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का प्रमुख सैन्य अड्डा भी है। इसके अलावा देश का सबसे बड़ा क्लाउड सीडिंग प्रोजेक्ट भी इसी शहर में है। इस्फहान में ईरानी सेना का प्रमुख एयरबेस भी स्थित है, जिसका इस्तेमाल ईरान कई जंगों में में करता आया है। इसके अवाला इस्फहान में ईरान का न्यूक्लियर प्लांट भी है।

क्या संदेश देना चाहते हैं नेतन्याहू?

ईरान के इस्फहान शहर पर हमले से इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू यह संदेश दे सकते हैं कि वह ईरान के सबसे मजबूत स्ट्रैटजिक शहर को कभी भी निशाना बनाने की क्षमता रखते हैं। अगर जंग होती है तो ईरान सबसे पहले इसी शहर को टारगेट करेगा और उसकी कमर को तोड़कर रख देगा। दरअसल, इस हमले से यह संदेश भी जाएगा कि इजराइल कभी भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को भी डिरेल कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो इजराइल को बहुत बड़ा झटका लगेगा।

ईरान की ओर से हमले को लेकर क्या कहा गया?

वहीं, ईरान ने मिसाइल हमले की खबरों का खंडन किया है। ईरान ने कहा कि कोई मिसाइल हमला नहीं हुआ बल्कि केवल ड्रोन हमले हुए हैं। ईरानी राज्य मीडिया ने शुक्रवार को बताया कि मध्य प्रांत इस्फ़हान के आसमान में कई छोटी उड़ने वाली वस्तुओं को गोली मार दी गई। ईरानी मीडिया ने बताया कि तेहरान, इस्फ़हान और शिराज के लिए उड़ानें निलंबित कर दी गई हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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