Lt Gen Nauman Mahmood: पाकिस्तान ने रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल नौमान महमूद को उस सचिवालय का पहला महासचिव नियुक्त किया है जो मक्का समझौते- सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच त्रिपक्षीय रक्षा समझौता के लागू होने की देखरेख करेगा।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने X पर एक पोस्ट में लिखा, 'पाकिस्तान सरकार, मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत लेफ्टिनेंट जनरल नौमान महमूद, हिलाल-ए-इम्तियाज (सैन्य), (रिटायर्ड) को पहले महासचिव के रूप में नियुक्त करने की घोषणा करते हुए प्रसन्न है।'
आगे कहा गया, 'महासचिव रियाद में स्थापित किए जा रहे गठबंधन के सामान्य सचिवालय का नेतृत्व करेंगे।'
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने अगस्त में मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें तीनों देशों में से किसी एक पर भी सशस्त्र हमले को तीनों पर हमला मानने का संकल्प लिया गया था।
यह समझौता इस्लामाबाद और रियाद के बीच सितंबर 2025 में हस्ताक्षरित एक अलग द्विपक्षीय आपसी रक्षा समझौते के बाद हुआ था। दोनों समझौतों के पूर्ण परिचालन प्रावधानों को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
'लाल सागर में शिपिंग का नियंत्रण छीनने के लिए किए जा रहे सैन्य हमले'
लेफ्टिनेंट जनरल महमूद की नियुक्ति यमन के ईरान-समर्थित हूतियों द्वारा सऊदी अरब से लाल सागर में शिपिंग का नियंत्रण छीनने के लिए किए जा रहे सैन्य हमले की पृष्ठभूमि में हुई है। इस महीने की शुरुआत में, सऊदी अरब ने दावा किया था कि उन्होंने इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल मक्का के पास प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में आ रहे एक ड्रोन को रोका था। हूतियों ने किसी भी भूमिका से इनकार किया। तुर्की और पाकिस्तान ने मक्का को कथित रूप से निशाना बनाए जाने की निंदा की, लेकिन सैन्य मदद का वादा नहीं किया।
इस बीच, हूती हाल के हफ्तों में यमन के लाल सागर तट पर रणनीतिक बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के आसपास आगे बढ़े हैं, जिससे शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति में और अधिक व्यवधान की आशंका बढ़ गई है, जो पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से प्रभावित है।
लेफ्टिनेंट जनरल नौमान महमूद कौन हैं?
लेफ्टिनेंट जनरल नौमान महमूद ने पहले नवंबर 2021 से अप्रैल 2023 तक इस्लामाबाद में नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी के 35वें प्रेसिडेंट के तौर पर काम किया। उन्होंने नॉर्थ वजीरिस्तान जिले में इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) के तौर पर भी काम किया।
लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर प्रमोट होने से पहले, महमूद-मेजर जनरल के पद पर रहते हुए-इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के एनालिसिस विंग के डायरेक्टर-जनरल थे। बाद में उन्हें रावलपिंडी में पाकिस्तान आर्मी जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में कम्युनिकेशन और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ब्रांच के लिए इंस्पेक्टर-जनरल (IG) नियुक्त किया गया।
महमूद बलूच रेजिमेंट से थे और अप्रैल 2019 में उन्हें लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर प्रमोट किया गया। इसके बाद दिसंबर 2019 में उन्हें XI कोर का कमांडर नियुक्त किया गया; वे इस पद पर 23 नवंबर 2021 तक रहे, जब लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद ने उनकी जगह ली।
उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते टकराव के कारण सऊदी अरब के प्रति पाकिस्तान की रक्षा प्रतिबद्धताओं पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।

देखना होगा कि पाकिस्तान सऊदी की समस्याओं को कितना हल कर पाएगा?
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बुधवार को सऊदी नेशनल डे के मौके पर हालिया हूथी हमलों की निंदा करते हुए कहा, 'पाकिस्तान सऊदी अरब की संप्रभुता, सुरक्षा और इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों की पवित्रता की रक्षा में पूरी मज़बूती से, कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।'
शरीफ ने सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान के लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी बताया और दो रक्षा समझौतों का जिक्र किया। उन्होंने किसी नई तैनाती की घोषणा नहीं की और न ही यह बताया कि क्या रियाद ने सैन्य मदद मांगी है।
शरीफ की ये बातें मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र में हुई एक बैठक के बाद सामने आईं, जिसमें पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत रियाद के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया और साथ ही व्यापक क्षेत्रीय संकट के कूटनीतिक समाधान का आह्वान किया। बयान में कहा गया, 'मंत्रियों ने सऊदी अरब के खिलाफ हुए सभी हमलों की कड़ी निंदा की, जिसमें हाल ही में हुए हूथी हमले भी शामिल हैं। उन्होंने सऊदी अरब की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा के लिए अपना अटूट समर्थन दोहराया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार, सऊदी अरब के अपनी रक्षा करने, अपने क्षेत्र और अपने लोगों की सुरक्षा करने के अधिकार को भी दोहराया। साथ ही, उन्होंने समुद्री नेविगेशन की सुरक्षा और आजादी को बनाए रखने के महत्व पर भी जोर दिया।'
आगे कहा गया, 'मंत्रियों ने यमन की वैध सरकार और प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के लिए अपना अटूट समर्थन दोहराया। ये समर्थन यमन में सुरक्षा, स्थिरता और विकास लाने की उनकी कोशिशों के लिए है, जो एक राजनीतिक प्रक्रिया और अलग-अलग पक्षों को शामिल करते हुए यमनी-यमनी बातचीत के जरिए की जा रही हैं।'
