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क्या यूक्रेन के खिलाफ परमाणु हथियार का इस्तेमाल करने के बारे में सोच रहे हैं पुतिन? इशारों-इशारों में दे दी धमकी

Russia vs Ukraine: क्या रूस के राष्ट्रपति यूक्रेन के खिलाफ परमाणु हथियार का इस्तेमाल करने के बारे में विचार कर रहे हैं? ये सवाल इसलिए खड़ा हो रहा है, क्योंकि खुद व्लादिमीर पुतिन ने जेलेंस्की को इशारों-इशारों में चेतावनी देते हुए ये कहा है कि उम्मीद करता हूं कि यूक्रेन के खिलाफ परमाणु हथियारों की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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रूस ने यूक्रेन को दी धमकी।

Vladimir Putin Warns Volodymyr Zelenskyy: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रविवार को प्रसारित एक संदेश में कहा कि यूक्रेन में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की आवश्यकता नहीं पड़ी है और उम्मीद करता हूं कि आगे भी ऐसी आवश्यकता नहीं पड़ेगी। तो क्या पुतिन ने इशारों-इशारों में यूक्रेन को परमाणु हथियार की चेतावनी दी है। आखिर रूसी राष्ट्रपति ने क्या कुछ कहा आपको सबकुछ बताते और समझाते हैं।

पुतिन ने इशारों-इशारों में यूक्रेन को दी परमाणु हथियारों की धमकी

सरकारी टेलीविजन पर पुतिन का साक्षात्कार प्रसारित होने से पहले टेलीग्राम पर साक्षात्कार का पूर्वावलोकन साझा किया गया है जिसमें पुतिन कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि रूस के पास यूक्रेन में संघर्ष को 'तार्किक निष्कर्ष' तक पहुंचाने की ताकत और साधन है।

परमाणु हथियारों के उपयोग को लेकर क्या बोले राष्ट्रपति पुतिन

यूक्रेन द्वारा रूसी क्षेत्र पर किये जा रहे हमलों के संदर्भ में पूछे गए एक सवाल के जवाब में पुतिन ने कहा, 'उन (परमाणु) हथियारों का उपयोग करने की कोई आवश्यकता नहीं थी... और मुझे आशा है कि उनकी आवश्यकता नहीं होगी।'

उन्होंने कहा, 'हमारे पास पर्याप्त शक्ति और साधन हैं, जिससे 2022 में जो शुरू किया गया था, उसे रूस की अपेक्षाओं के अनुरूप तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचाया जा सके।' पुतिन ने नवंबर 2024 में रूस की संशोधित परमाणु नीति को मंजूरी दी थी, जिसमें उन परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है जो उन्हें रूस के परमाणु शस्त्रागार का उपयोग करने की अनुमति देती हैं। रूस के पास दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु हथियार जखीरा है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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