अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को ओमान को चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि अगर उसने ईरान के साथ मिलकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य में किसी 'टोल सिस्टम' को लागू करने में मदद की, तो अमेरिका सख्त कार्रवाई करेगा।
बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी पोस्ट में ओमान को खुली चेतावनी दी। इसमें उन्होंने लिखा कि अमेरिका किसी भी ऐसी व्यवस्था को बर्दाश्त नहीं करेगा, जिसमें जहाजों से गुजरने के लिए शुल्क वसूला जाए। उन्होंने कहा कि ओमान समेत कोई भी देश अगर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से टोल व्यवस्था में शामिल पाया गया, तो अमेरिकी ट्रेजरी उसके खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगाएगी।
बेसेंट बोले- डराने के ईरान के दिन खत्म हो गए
उन्होंने कहा कि सभी देशों को ईरान के उन प्रयासों को खारिज कर देना चाहिए, जिनसे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। बेसेंट ने यह भी कहा कि तेहरान के क्षेत्र और दुनिया को डराने-धमकाने के दिन खत्म हो चुके हैं।
दरअसल, ईरान और ओमान इन दिनों में हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा और संचालन के लिए एक नई व्यवस्था तैयार करने पर काम कर रहे हैं। ईरान का कहना है कि समुद्री सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसी सेवाओं के लिए कुछ शुल्क लेना स्वाभाविक है।
ट्रंप ने भी ओमान को दी थी चेतावनी
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बुधवार को ओमान को चेतावनी दी थी कि वह इस रणनीतिक जलमार्ग से जुड़े किसी समझौते में हस्तक्षेप न करे। ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका ऐसा कोई अल्पकालिक समझौता स्वीकार नहीं करेगा, जिससे ईरान और ओमान को इस अहम समुद्री मार्ग पर नियंत्रण मिले।
अमेरिका ने ईरान की PGSA पर भी लगाए प्रतिबंध
इससे पहले, बुधवार को अमेरिका ने ईरान की नई संस्था Persian Gulf Strait Authority (PGSA) पर भी प्रतिबंध लगा दिए। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, यह संस्था हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से अवैध टोल वसूलने और उस धन को आईआरजीसी तक पहुंचाने का काम कर रही थी।
अमेरिका का आरोप है कि पीजीएसए, आईआरजीसी और उसकी नौसेना के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। इसी वजह से संस्था को अमेरिकी प्रतिबंध सूची में शामिल किया गया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। वैश्विक तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव या नियंत्रण व्यवस्था पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार और तेल कीमतों को प्रभावित कर सकती है।
