दुनिया

व्हाइट हाउस में नहीं पड़ेगी भारत की चमक फीकी, कमला जाएंगी तो 'ऊषा' आएंगी, बैलेंस रहेगा सत्ता का पॉवर जोन

US Presidential Election Result: कमला हैरिस की जगह अमेरिकी उपराष्ट्रपति का पद संभालने जा रहे जेडी वेंस का भी कनेक्शन भारत से है। दरअसल, अमेरिकी वाइस प्रेसिडेंट के संभावित उम्मीदवार जेडी वेंस ने भारतीय मूल की ऊषा चिलुकुरी से शादी की है।

Image

जेडी वेंस की भारतीय मूल की पत्नी ऊषा चिलुकुरी।

US Presidential Election Result: अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप ने निर्णायक बढ़त बना ली है। उनकी जीत लगभग तय हो गई है। इसी के साथ डेमोक्रेटिक की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार कमला हैरिस की व्हाइट हाउस से विदाई भी तय हो गई है। कमला हैरिस वर्तमान में अमेरिका की उपराष्ट्रपति हैं। डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव जीतने के बाद रिपब्लिकन पार्टी के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जेसी वेंस पद संभालेंगे।

बता दें, कमला हैरिस भारतीय मूल की थीं। उनकी मां भारत से थीं। अब उनकी जगह उपराष्ट्रपति का पद संभालने जा रहे जेडी वेंस का भी कनेक्शन भारत से है। दरअसल, अमेरिकी वाइस प्रेसिडेंट के संभावित उम्मीदवार जेडी वेंस ने भारतीय मूल की ऊषा चिलुकुरी से शादी की है। ऊषा का नाता भारत के आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले से हैं।

कौन हैं ऊषा चिलुकुरी?

जेडी वेंस की पत्नी ऊषा चिलुकुरी अमेरिका में एक राष्ट्रीय लॉ फर्म में वकील हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने येल यूनिवर्सिटी से इतिहास में स्नातक डिग्री और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से दर्शनशास्त्र में मास्टर्स की डिग्री ली है। वह चिलुकुरी भारत के आंध्र प्रदेश के भारतीय प्रवासियों की बेटी हैं, जो कैलिफोर्निया के सैन डिएगो में बस गए थे। उनके पिता के एक मैकेनिकल इंजीनियर और मां जीव विज्ञानी हैं।

2014 में हुई थी शादी

ऊषा और जेडी वेंस की पहली मुलाकात 2010 में येन लॉ स्कूल में पढ़ाई के दौरान हुई थी। यहीं से दोनों एक-दूसरे के करीब आए और 2014 में हिंदू रीति-रिवाज से दोनों ने शादी कर दी। दोनों के तीन बच्चे हैं। जिसमें दो बेटे इवान और विवेक हैं और एक बेटी, जिसका नाम मिराबेल है। एक इंटरव्यू के दौरान ऊषा चिलुकुरी ने कहा था कि मैं एक धार्मिक परिवार में पली-बढ़ी हूं। मेरे माता-पिता हिंदू हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article