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'बेगुनाह था बांग्लादेश में मारा गया हिंदू युवक', VIDEO साझा कर तसलीमा नसरीन बोलीं- सहकर्मी ने लगाए झूठे आरोप

Bangladesh Mob Lynching: बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता तसलीमा नसरीन ने दावा किया कि 25 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास पर ईशनिंदा का झूठा आरोप लगाया गया था। वह पूरी तरह निर्दोष था। बता दें कि ईशनिंदा के आरोप में हिंसक भीड़ ने हिंदू युवक दीपू चंद्र दास को बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला। दीपू फैक्ट्री में काम करता था और मैमनसिंह के तारकंडा उपजिला का रहने वाला था।

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बांग्लादेश में भारी बवाल (फोटो साभार: AP)

Photo : AP

Bangladesh Mob Lynching: बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के विरोधी उस्मान हादी की मौत के बाद कोहराम मचा हुआ है। हिंसक भीड़ ने एक हिंदू युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी। इस बीच, बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता तसलीमा नसरीन ने दावा किया कि 25 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास पर ईशनिंदा का झूठा आरोप लगाया गया था। वह पूरी तरह निर्दोष था।

ईशनिंदा के आरोप में हिंसक भीड़ ने हिंदू युवक दीपू चंद्र दास को बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला। दीपू फैक्ट्री में काम करता था और मैमनसिंह के तारकंडा उपजिला का रहने वाला था।

मुस्लिम सहकर्मी पर दीपू को फंसाने का आरोप

तसलीमा के मुताबिक, फैक्ट्री में काम करने वाले एक मुस्लिम सहकर्मी ने किसी मामूली बात पर दीपू चंद्र को फंसाने के लिए भीड़ के सामने उस पर ईशनिंदा का आरोप लगाया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर दीपू चंद्र का पुलिस सुरक्षा में होने का एक वीडियो शेयर करते हुए कहा, ''दीपू चंद्र ने भालुका में एक फैक्ट्री में काम किया। वह एक गरीब मजदूर था। एक दिन, एक मुस्लिम सहकर्मी उसे किसी मामूली बात पर सजा देना चाहता था, इसलिए उसने भीड़ के बीच दीपू पर पैगंबर के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया। इतना ही काफी था।''

पुलिस सुरक्षा में था दीपू

बकौल तसलीमा नसरीन, पुलिस के हस्तक्षेप के बावजूद भीड़ ने दीपू पर बेरहमी से हमला किया। भीड़ लकड़बग्घों की तरह दीपू पर झपट्टा मार रही, लेकिन पुलिस ने उसे बचाया और हिरासत में लिया। जिसका मतलब है कि दीपू पुलिस सुरक्षा में था। उन्होंने दावा किया कि दीपू ने खुद को बेगुनाह बताया और कहा कि उसने पैगंबर के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की और आरोप लगाया कि यह घटना उसके सहकर्मी की साजिश थी।

तसलीमा नसरीन ने सवाल उठाया कि पुलिस ने दीपू के सहकर्मी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस में से कई लोग जिहाद के प्रति सहानुभूति रखते हैं। क्या कट्टर सोच के कारण पुलिस ने दीपू को फिर से उग्र लोगों के हवाले कर दिया, या फिर कट्टरपंथियों ने थाने से उसे जबरन निकाल लिया? इसके बाद दीपू के साथ मारपीट की गई, उसे लटकाया गया और जला दिया गया।

परिवार का एकमात्र सहारा था दीपू

बकौल तसलीमा नसरीन, दीपू परिवार का एकलौता सहारा था। उसी की कमाई से उसके दिव्यांग पिता, मां, पत्नी और बच्चे का गुजारा होता था। उन्होंने कहा, ''अब उसके परिवार का क्या होगा? उनकी मदद कौन करेगा? इन पागल हत्यारों को इंसाफ के कटघरे में कौन लाएगा?''

Anurag Gupta
अनुराग गुप्ताauthor

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से ही वे न्यूजरूम के विभिन्न आयामों—कॉपी एडिटिंग, कंटेंट क्यूरेशन और रियल-टाइम न्यूज मॉनिटरिंग में दक्षता के साथ काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और ब्रेकिंग न्यूज पर उनकी मजबूत पकड़ है। अनुराग खबरों की बारीकियों को समझने, फैक्ट चेकिंग और स्टोरी के अहम पहलुओं को पाठकों तक सरल भाषा में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अब तक 10 हजार से अधिक खबरें प्रकाशित की हैं, जिनमें ब्रेकिंग अपडेट्स, एनालिटिकल कंटेंट, स्पेशल स्टोरीज और न्यूज एक्सप्लेनर्स शामिल हैं।

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