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पहली बार दुनिया के मंच पर दिखेगा तालिबान, संयुक्त राष्ट्र की इस बड़ी बैठक में होगा शामिल

UN Climate Conference: 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता पर काबित होने ने के बाद यह पहला मौका होगा, जब तालिबान दुनिया के किसी बड़े मंच को साझा करेगा। यह महत्वपूर्ण इसलिए भी है, क्योंकि तालिबान को फिलहाल अफगानिस्तान के वैध शासक के रूप में आधिकारिक मान्यता नहीं मिली है।

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Taliban

UN Climate Conference: अजरबैजान में होने जा रही संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन की बैठक में तालिबान भी हिस्सा लेगा। 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता पर काबित होने ने के बाद यह पहला मौका होगा, जब तालिबान दुनिया के किसी बड़े मंच को साझा करेगा। अफगानिस्तान की राष्ट्रीय पर्यावरण एजेंसी ने इसकी जानकारी दी। यह महत्वपूर्ण इसलिए भी है, क्योंकि तालिबान को फिलहाल अफगानिस्तान के वैध शासक के रूप में आधिकारिक मान्यता नहीं मिली है।

राष्ट्रीय पर्यावरण संरक्षण एजेंसी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि एक तकनीकी प्रतिनिधिमंडल सम्मेलन में भाग लेने के लिए बाकू गया है। एजेंसी के प्रमुख मतिउल हक खलीस ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल इस सम्मेलन का उपयोग पर्यावरण संरक्षण व जलवायु परिवर्तन पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ सहयोग को मजबूत करने और जलवायु अनुकूलन व शमन प्रयासों पर चर्चा करने के लिए करेगा।

अजरबैजान में होगा सम्मेलन

सीओपी29 के नाम से जाना जाने वाला यह सम्मेलन सोमवार को अजरबैजान में शुरू हो रहा है। यह सम्मेलन उन महत्वपूर्ण बहुपक्षीय वार्ताओं में से एक है, जिसमें तालिबान शामिल हो रहा है। विशेषज्ञों ने बताया कि जलवायु परिवर्तन ने अफगानिस्तान पर कई और नकारात्मक प्रभाव डाले हैं, जिससे देश की भौगोलिक स्थिति और कमजोर जलवायु नीतियों के कारण गंभीर चुनौतियां पैदा हुई हैं। काबुल विश्वविद्यालय में पर्यावरण विज्ञान के प्रोफेसर हयातुल्ला मशवानी ने कहा, जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में वृद्धि हुई है, जिससे जल स्रोत कम हो गए हैं और सूखे की स्थिति पैदा हो गई है। इन सबसे कृषि पर काफी असर पड़ रहा है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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