Hormuz Crisis Deepen: अमेरिका और ईरान के बीच जंग का मुख्य कारण बने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की ओर इस समय दुनिया टकटकी लगाए देख रही है। जंग की शुरुआत में ही रणनीतिक बढ़त लेने के उद्देश्य से ईरान ने होर्मुज के रास्तों पर बारूदी सुरंगे बिछा दी थीं,जिसने अमेरिका की नीद हराम है। अब अमेरिका की गुहार पर जापान और जर्मनी के बाद तुर्किये भी इन बारूदी सुरंगो को हटाने के लिए आगे आया है।
तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा है कि अगर ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता होता है, तो तुर्किये होर्मुज जलडमरूमध्य में माइंस हटाने (डीमाइनिंग) अभियान में हिस्सा लेने पर विचार कर सकता है। उन्होंने ये बात लंदन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही। फिदान ने कहा कि किसी संभावित समझौते के बाद अलग-अलग देशों की एक तकनीकी टीम होर्मुज में माइंस को हटाने का काम कर सकती है। ऐसे में मानवीय जिम्मेदारी समझते हुए तुर्किये ऐसे प्रयासों के साथ है।
हालांकि, फिदान ने इस दौरान यह भी साफ किया कि अगर यह बहुराष्ट्रीय तकनीकी गठबंधन भविष्य में किसी नए संघर्ष का पक्ष बनता है,तो तुर्किये अपनी भूमिका पर दोबारा विचार करेगा। उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों का समाधान पाकिस्तान में होने वाली अगली वार्ता में निकल सकता है।
जापान कर रहा विचार
इससे पहले, जापान सरकार ने होर्मुज में समुद्री आत्मरक्षा बल (MSDF) के माइंसवीपर जहाज भेजने की संभावना पर अपना इंटरेस्ट दिखाया था। इस बाबत सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी की नीति अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष ताकायुकी कोबायाशी ने प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची को सिफारिशें सौंपी हैं। इसमें कहा गया कि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त होने के बाद सरकार को माइंसवीपर भेजने पर विचार करना चाहिए।
होर्मुज मिशन में उतरने को जर्मनी तैयार
वहीं, जर्मनी भी होर्मुज में माइंसवीपर जहाजों की तैनाती की योजना बना रहा है। जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने कहा कि उनका देश माइंसवीपर जहाजों को भूमध्यसागर में तैनात करने की योजना बना रहा है, जिन्हें बाद में होर्मुज भेजा जा सकता है।
बोरिस पिस्टोरियस ने बीते शनिवार को जर्मन अखबार राइनिशे पोस्ट से कहा, ''हम एक माइंसवीपर जहाज को भूमध्यसागर में तैनात करेंगे और उसके साथ एक कमांड एवं सप्लाई जहाज भी भेजेंगे।'' हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि ये जहाज कब रवाना होंगे
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में गिना जाता है, इसलिए यहां सुरक्षा और नौवहन सुचारु रखना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
