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Russia-Ukraine War: यूक्रेन की सबसे खूनी लड़ाई भी हारे जेलेंस्की, बखमुत शहर पर रूसी फौज ने जमाया कब्जा

  • Edited by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 21, 2023, 03:01 PM IST

Russia Ukraine War: पूर्वी यूक्रेन के इस शहर पर नियंत्रण के लिए आठ महीने से जारी लड़ाई युद्धग्रस्त देश में सबसे लंबी और संभवत: सबसे खूनी लड़ाई है। विश्लेषकों का कहना है कि बखमुत में हार यूक्रेन के लिए एक झटका होगी और इससे रूस को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है, लेकिन यह युद्ध के नतीजे के लिहाज से निर्णायक साबित नहीं होगी।

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रूस-यूक्रेन संघर्ष

Photo : AP

Russia Ukraine War: रूस के रक्षा मंत्रालय ने रविवार तड़के दावा किया कि देश की निजी सेना 'वैगनर' ने रूसी सैनिकों की मदद से यूक्रेन के बखमुत शहर पर कब्जा जमा लिया है। इसके कुछ घंटों बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने यह कहते हुए इसकी पुष्टि कर दी कि बखमुत अब केवल हमारे दिलों में है। जापान के हिरोशिमा में जी-7 समूह के शिखर सम्मेलन में जेलेंस्की ने कहा कि उन्हें लगता है कि यूक्रेन ने इस शहर को गंवा दिया, लेकिन आपको यह समझना होगा कि कुछ बचा नहीं है। उन्होंने सब कुछ बर्बाद कर दिया है। उन्होंने कहा, आज बखमुत केवल हमारे दिलों में है। वहां कुछ नहीं बचा है।

रूसी मंत्रालय का बयान उसके टेलीग्राम चैनल पर तब आया है, जब आठ घंटे पहले वैगनर के प्रमुख येवजेनी प्रिगोझिन ने भी ऐसा ही दावा किया था। उस समय यूक्रेनी प्राधिकारियों ने कहा था कि बखमुत के लिए लड़ाई अब भी जारी है। पूर्वी यूक्रेन के इस शहर पर नियंत्रण के लिए आठ महीने से जारी लड़ाई युद्धग्रस्त देश में सबसे लंबी और संभवत: सबसे खूनी लड़ाई है।

पुतिन ने दी सशस्त्र बलों को बधाई

इस शहर के सोवियत काल के नाम का इस्तेमाल करते हुए रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा, आत्र्योमोव्स्क सामरिक दिशा में वैगनर निजी सेना कंपनी ने दक्षिणी युद्ध समूह के तोपखानों और विमानों के सहयोग से आत्र्योमोव्स्क शहर के मुक्त कराने का अभियान पूरा कर लिया है। रूस की सरकारी समाचार एजेंसियों ने क्रेमलिन की प्रेस सेवा के हवाले से कहा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने वैगनर की हमलावर टुकड़ियों के साथ ही रूस के सशस्त्र बलों की इकाइयों के सभी सैनिकों को बधाई दी, जिन्होंने उन्हें आत्र्योमोव्स्क मुक्त कराने के अभियान को पूरा करने पर आवश्यक सहयोग दिया।

पहले रूसी दावे का खंडन कर रहा था यूक्रेन

टेलीग्राम पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में, वैगनर के प्रमुख प्रिगोझिन ने कहा कि शनिवार दोपहर को बखमुत पूरी तरह से रूसी नियंत्रण में आ गया। वीडियो में प्रिगोझिन के साथ छह लड़ाके नजर आ रहे थे और उनके पीछे खंडहर हो गई इमारतें दिख रही थीं, जबकि दूर से विस्फोट की आवाजें भी सुनाई दे रही थीं। हालांकि, वीडियो सामने आने के बाद यूक्रेन की उप रक्षा मंत्री हन्ना मलियार ने कहा था कि लड़ाई अब भी जारी है। उन्होंने कहा था, स्थिति गंभीर है। अभी तक की स्थिति के अनुसार इस क्षेत्र में कुछ औद्योगिक और बुनियादी सुविधाओं पर हमारे सुरक्षा बलों का नियंत्रण बरकरार है।

आठ महीने से जारी थी लड़ाई

बखमुत और उसके आसपास आठ महीने से अधिक समय से लड़ाई जारी है। यदि रूसी सेनाओं ने बखमुत पर कब्जा कर लिया है, तो उन्हें अभी भी यूक्रेन के नियंत्रण वाले दोनेत्स्क क्षेत्र के बाकी हिस्से को अपने नियंत्रण में लेने का बड़ा काम करना होगा। फिलहाल यह साफ नहीं है कि बखुमत में लड़ाई में किस पक्ष को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ी है। ऐसा माना जा रहा है कि शहर में रूस और यूक्रेन, दोनों के हजारों लोगों की जान गई है। हालांकि, किसी भी पक्ष ने मृतकों की संख्या का खुलासा नहीं किया है।

यूक्रेन के लिए बड़ा झटका

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने मार्च में संवाद एजेंसी ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ के साथ एक साक्षात्कार में बखमुत का बचाव करने के महत्व को रेखांकित किया था।

उन्होंने कहा था कि बखमुत को गंवाने से रूस को ऐसे सौदे के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में मदद मिलेगी, जिसमें कीव को अस्वीकार्य शर्तें स्वीकार करनी पड़ सकती हैं। विश्लेषकों का कहना है कि बखमुत में हार यूक्रेन के लिए एक झटका होगी और इससे रूस को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है, लेकिन यह युद्ध के नतीजे के लिहाज से निर्णायक साबित नहीं होगी।

रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है बखमुत

बखमुत रूस के कब्जे वाली दोनेत्स्क की क्षेत्रीय राजधानी के 55 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। शहर की आबादी 80,000 के आसपास होने का अनुमान है। बखमुत को नमक और जिप्सम की खदानों से घिरा एक महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र माना जाता है। रूस के रक्षा मंत्री सर्गेइ शोइगु ने कहा कि इस शहर पर कब्जा जमाने से रूस को दोनेत्स्क क्षेत्र में अपने अभियान को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी, जो यूक्रेन के उन चार प्रांतों में से एक है, जिन पर मॉस्को ने सितंबर में गैर-कानूनी तरीके से कब्जा जमा लिया था।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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