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यूक्रेन के साथ जंग के कारण रूस हो रहा कमजोर? बोले पुतिन के अर्थव्यवस्था मामलों के मंत्री- देश जा रहा मंदी की ओर

अर्थशास्त्रियों ने रूस की अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव और सैन्य क्षेत्र के अलावा अन्य क्षेत्रों में निवेश की कमी के कारण वृद्धि के स्थिर होने की संभावना के बारे में चेतावनी दी है। सेंट पीटर्सबर्ग में फोरम के एक सत्र में रेशेतनिकोव ने कहा कि रूस ‘किनारे पर’ है और देश मंदी की ओर बढ़ेगा या नहीं, यह सरकार के कार्यों पर निर्भर करता है।

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रूस के राष्ट्रपति पुतिन (फाइल फोटो)

Photo : PTI

यूक्रेन के साथ जंग के कारण अब रूस को नुकसान होता दिख रहा है। रूस की अर्थव्यवस्था डगमगाने लगी है। रूस के मंत्री अब खुद ये बात मानने लगे हैं। रूस, यूक्रेन के साथ पिछले 3 साल से ज्यादा समय से जंग में है। इस जंग में यूक्रेन तो पूरी तरह से बर्बाद हो ही चुका है, अब रूस की स्थिति में खराब हो चली है।

मंदी की ओर रूस

रूस के आर्थिक मामलों के मंत्री मैक्सिम रेशेतनिकोव ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश की अर्थव्यवस्था ‘मंदी’ में जा रही है। रूसी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रेशेतनिकोव ने सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकनॉमिक फोरम में यह बात कही। यह रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर में आयोजित होने वाला वार्षिक कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य देश की आर्थिक ताकत को उजागर करना और विदेशी निवेशकों को आकर्षित करना है। रूस के मीडिया समूह आरबीसी ने मंत्री के हवाले से कहा कि आंकड़े नरमी का संकेत देते हैं, लेकिन हमारे सभी आंकड़े ‘रियरव्यू मिरर’ की तरह हैं। वर्तमान में कंपनियों की धारणा और संकेतकों को देखते हुए, मुझे लगता है कि हम पहले से ही मंदी की कगार पर हैं।’’

गरीब क्षेत्रों की आय बढ़ी

रूस के फरवरी, 2022 में यूक्रेन में सेना भेजे जाने के बाद प्रतिबंध झेल रही रूस की अर्थव्यवस्था ने अबतक पूर्वानुमानों से बेहतर प्रदर्शन किया है। उच्च रक्षा व्यय ने वृद्धि को गति दी है और मुद्रास्फीति में तेजी के बावजूद बेरोजगारी को कम रखा है। साथ ही, मुद्रास्फीति के हिसाब से वेतन में वृद्धि हुई है, जिससे कई श्रमिकों की स्थिति बेहतर हुई है। सैन्य भर्ती के लिए बड़े भर्ती बोनस और यूक्रेन में मारे गए लोगों के लिए मृत्यु लाभ ने भी देश के गरीब क्षेत्रों में अधिक आय सृजित की है। लेकिन लंबी अवधि में, मुद्रास्फीति और विदेशी निवेश की कमी अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बनी हुई है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि कि सैन्य खर्चों पर आधारित अर्थव्यवस्था कितने समय तक चल सकती है।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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