नोबेल पुरस्कार को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तो कई बार बोल चुके हैं, नॉर्वे को धमका चुके हैं। अब इसी नोबेल पुरस्कार के कारण अमेरिका और पोलैंड के बीच रिश्ते खराब होते दिख रहे हैं। पोलैंड ने ट्रंप को नोबेल पुरस्कार दिए जाने के प्रस्ताव को समर्थन देने से इनकार कर दिया है, जिसेके कारण पोलेंड के पीएम तक ने अमेरिका को खरीखोटी सुना दी है।
पोलैंड अमेरिका के बीच कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह विवाद पोलैंड की संसद के स्पीकर व्लोदजिमिएर्ज चार्जास्टी के उस फैसले के बाद सामने आया, जिसमें उन्होंने ट्रंप के नामांकन का समर्थन करने से इनकार कर दिया। दरअसल, यह पहल अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के स्पीकर माइक जॉनसन और इजराइल की संसद कनेसेट के स्पीकर अमीर ओहाना की ओर से की गई थी। दोनों नेताओं ने दुनियाभर के संसदीय प्रमुखों से अपील की थी कि वे मध्य पूर्व में शांति प्रयासों के लिए डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने का समर्थन करें। हालांकि, पोलैंड के स्पीकर चार्ज़ास्टी ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और ट्रंप की विदेश नीति पर सवाल खड़े किए।
ट्रंप नोबेल शांति पुरस्कार के योग्य नहीं- चार्जास्टी
चार्जास्टी ने कहा कि उनके अनुसार ट्रंप की नीतियां अंतरराष्ट्रीय संगठनों में स्थिरता लाने के बजाय तनाव बढ़ाने वाली हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति “ताकत की राजनीति” और दबाव की रणनीति अपनाते हैं, जो शांति पुरस्कार की भावना के खिलाफ है। इसी आधार पर उन्होंने साफ किया कि ट्रंप नोबेल शांति पुरस्कार के योग्य नहीं हैं।
बरस पड़े अमेरिकी राजदूत
इस बयान पर पोलैंड में तैनात अमेरिकी राजदूत टॉम रोज ने तीखी प्रतिक्रिया दी। सोशल मीडिया पर उन्होंने कहा कि ट्रंप के खिलाफ की गई टिप्पणियां अपमानजनक हैं और इससे पोलैंड-अमेरिका के अच्छे संबंधों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि चार्जास्टी जैसे नेताओं का रवैया द्विपक्षीय रिश्तों में बाधा बन सकता है।
पोलैंड पीएम ने संभाला मोर्चा
मामला बढ़ने पर पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने अमेरिकी राजदूत को जवाब देते हुए कहा कि सहयोगी देशों के बीच आपसी सम्मान सबसे अहम है और किसी भी तरह की सार्वजनिक फटकार साझेदारी की भावना के अनुरूप नहीं है। टस्क ने साफ किया कि पोलैंड दोस्ती को बराबरी और सम्मान के आधार पर देखता है। उन्होंने कहा- "राजदूत रोज, सहयोगियों को एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए, लेक्चर नहीं। कम से कम हम, यहां पोलैंड में, साझेदारी को इसी तरह समझते हैं।"
नरम पड़े अमेरिकी राजदूत
इसके बाद अमेरिकी राजदूत ने अपने बयान को नरम करते हुए प्रधानमंत्री टस्क की प्रशंसा की और अमेरिका-पोलैंड संबंधों को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका को सराहा। हालांकि, उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिकी राष्ट्रपति का सार्वजनिक अपमान किसी भी पोलिश नेता को नहीं करना चाहिए। विवाद के बीच चार्ज़ास्टी ने कहा कि वह अमेरिकी राजदूत की प्रतिक्रिया को स्वीकार करते हैं, लेकिन अपने मूल सिद्धांतों से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका पोलैंड का अहम साझेदार है, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के नोबेल नामांकन का समर्थन करना उनके लिए संभव नहीं है।
