Pakistan Reaction on Rajnath Singh : नियंत्रण रेखा (LoC) पार करने वाले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बयान पाकिस्तान को मिर्ची की तरह लगी है। रक्षा मंत्री के बयान पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तान ने कहा कि इस तरह का बयान 'क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता के लिए खतरा है।' 24वें कारगिल दिवस के अवसर पर लद्दाख के द्रास में कारगिल युद्ध स्मारक पर जवानों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने बुधवार को कहा कि देश की संप्रभुता, एकता एवं अखंडता को सुरक्षित रखने के लिए हम कोई भी समझौता नहीं करेंगे।
'भविष्य में LoC पार करने में देरी नहीं करेंगे'
राजनाथ ने कहा कि '1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय सेना नियंत्रण रेखा के उस पार नहीं गई लेकिन इसका मतलब यह नहीं था कि हमारे अंदर काबिलियत नहीं थी बल्कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय संधियों एवं समझौतों का सम्मान किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि साफ शब्दों में कहा कि पाकिस्तान ने अगर हमें छेड़ा या हमें जरूरत पड़ी तो भविष्य में LoC पार करने में देरी नहीं करेंगे।'
हम अपनी सुरक्षा करने में पूरी तरह से समर्थ हैं-पाक
सिंह के इस बयान पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि वह किसी भी आक्रामक कार्रवाई से अपनी सुरक्षा करने में पूरी तरह से समर्थ है। बयान के मुताबिक पाकिस्तान ने कहा, 'हम भारत को इस तरह के बयान के लिए सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। इस तरह का बयान दक्षिण एशिया रणनीतिक माहौल को अस्थिर एवं क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता के लिए खतरा है।' बयान में आगे कहा गया कि भारत के नेताओं एवं सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की तरफ से इस तरह का यह पहला बयान नहीं है। उन्होंने कश्मीर, गिलगिट एवं बाल्टिस्तान के बारे में पहले भी 'बेहद गैर जिम्मेदाराना बयान' दिए हैं।
अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद से आपसी रिश्तों में तनाव
उन्होंने कहा था, ‘करगिल युद्ध भारत पर थोपा गया था। जिस वक्त भारत, पाकिस्तान के साथ बातचीत के जरिये मुद्दों की सुलझाने की कोशिश कर रहा था... पाकिस्तान ने हमारी पीठ में छुरा भोंक दिया।’उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों को ‘राष्ट्र के दुश्मनों’ का खात्मा करने के लिए खुली छूट दी गई है। कश्मीर मुद्दे और पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। पांच अगस्त, 2019 को भारत द्वारा संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने, जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को रद्द करने और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद दोनों देशों के बीच संबंध और खराब हो गए।
