Pakistan UNSC Meeting: पाकिस्तान की एक बार फिर से इंटरनेशनल बेज्जइती हुई है, जिस UNSC यानि कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् को भड़काने के लिए पाकिस्तान ने बैठक की मांग की थी, उसी बैठक में उसकी बेज्जइती हो गई। दरअअसल पहलगाम आतंकी हमले के बाद जब से भारत ने आतंकियों को मारने का ऐलान किया है, तब से पाकिस्तान को खौफ है कि भारत सीमापार हमला कर सकता है, ऐसे में वो भारत की UNSC में चुगली करने के लिए मीटिंग बुलाने की मांग की थी, पाकिस्तान फिलहाल UNSC में अस्थाई सदस्य है। पाकिस्तान की मांग पर UNSC ने बंद कमरे में मीटिंग बुलाई, इसी मीटिंग में पाकिस्तान को सदस्य देशों ने लपेटे में ले लिया।
मेन चेंबर में नहीं परामर्श कक्ष में हुई मीटिंग
पाकिस्तान की पहल पर बुलाई गई यह मीटिंग UNSC के मेन चेंबर में नहीं हुई, बल्कि उसके बगल के परामर्श कक्ष में हुआ। सुरक्षा परिषद ने बैठक के बाद कोई बयान जारी नहीं किया लेकिन पाकिस्तान ने दावा किया कि उसके उद्देश्य ‘‘काफी हद तक पूरे हो गए’’। अब जो जानकारी सामने आई है, उससे पता चला है कि मीटिंग में पाकिस्तान से ही उल्टे सवाल पूछ लिए गए, उसके आतंकी कनेक्शन पर सदस्य देशों ने तीखे सवाल पूछे।
आतंकी संगठन के साथ रिश्ते पर घिरा पाकिस्तान
न्यूयॉर्क में सूत्रों ने एएनआई को बताया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने सोमवार को अपने अनौपचारिक बंद कमरे की मीटिंग के दौरान पाकिस्तान से कई कड़े सवाल पूछे। सदस्यों ने पाकिस्तान के द्वारा लगाए गए "फॉल्स फ्लैग" नैरेटिव की कहानी को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और पूछा कि क्या लश्कर-ए-तैयबा, जो एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है, उसके साथ पाकिस्तान के गहरे संबंध हैं? इसी संगठन पर पहलगाम में आतंकी हमले करने का आरोप है।

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत असीम इफ्तिखार अहमद (फाइल फोटो)
किन-किन मुद्दों पर घिरा पाकिस्तान
सूत्रों ने कहा, आतंकवादी हमले की व्यापक निंदा की गई और जवाबदेही की आवश्यकता को मान्यता दी गई। कुछ सदस्यों ने विशेष रूप से पर्यटकों को उनके धार्मिक विश्वास के आधार पर निशाना बनाने का मुद्दा उठाया। कई सदस्यों ने चिंता व्यक्त की कि पाकिस्तान के मिसाइल परीक्षण और परमाणु बयानबाजी तनाव बढ़ाने वाले कारक थे।
बैठक के बाद किस देश ने क्या कहा
- संयुक्त राष्ट्र में राजनीतिक और शांति निर्माण मामलों के विभाग (डीपीपीए) एवं शांति अभियान विभाग (डीपीओ) में पश्चिम एशिया, एशिया और प्रशांत मामलों के लिए सहायक महासचिव खालिद मोहम्मद खैरी ने दोनों विभागों की ओर से सुरक्षा परिषद को जानकारी दी। खैरी ट्यूनीशिया से हैं। बैठक से बाहर आकर खैरी ने कहा कि ‘‘संघर्ष का समाधान संवाद और शांतिपूर्ण तरीके से निकालने’’ का आह्वान किया गया। उन्होंने कहा कि ‘‘स्थिति काफी अस्थिर है।’’
- संयुक्त राष्ट्र में यूनान के स्थायी प्रतिनिधि एवं वर्तमान यूएनएससी अध्यक्ष राजदूत इवेंजेलोस सेकेरिस ने इसे ‘‘सार्थक और उपयोगी बैठक’’ बताया। सेकेरिस ने पिछले सप्ताह कहा था कि स्थिति पर परिषद की बैठक ‘‘विचार व्यक्त करने का अवसर होगी और इससे तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है।’’
- बैठक से बाहर आकर रूस के एक राजनयिक ने कहा, ‘‘हमें तनाव कम होने की उम्मीद है।’’
- संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत असीम इफ्तिखार अहमद ने संवाददाताओं से कहा कि बैठक में देश के उद्देश्य ‘‘काफी हद तक पूरे और हासिल किए गए’’।
पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाया
पाकिस्तान ने भारत द्वारा 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित करने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पानी जीवन है, हथियार नहीं। ये नदियां 24 करोड़ से अधिक पाकिस्तानियों का भरण-पोषण करती हैं। अहमद ने कहा कि बैठक में पाकिस्तान ने ‘‘भारत सहित अपने सभी पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण, सहयोगात्मक संबंधों के लिए अपनी प्रतिबद्धता’’ दोहराई।

भारत ने चिनाब नदी का पानी रोका
भारत पहले से ही कर चुका था तैयारी
यूएनएससी की बैठक से पहले संयुक्त राष्ट्र में भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि राजदूत सैयद अकबरुद्दीन ने पीटीआई से बातचीत में कहा था कि ऐसी चर्चा से कोई परिणाम की उम्मीद नहीं की जा सकती है ‘‘जहां संघर्ष में शामिल एक पक्ष परिषद की अपनी सदस्यता का उपयोग करके धारणाओं को आकार देने की कोशिश करता है। भारत ऐसे पाकिस्तानी प्रयासों को विफल करेगा।’’
