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अवॉर्ड जीत चुकी फिल्म के रिलीज पर पाकिस्तान में बवाल, सिनेमाघरों में आग लगाने की मिल रही धमकी?

  • Written by: आलोक कुमार राव
  • Updated Nov 16, 2022, 06:44 PM IST

Ban on Joyland in Pakistan: इस फिल्म में एक शादीशुदा व्यक्ति को ट्रांसजेंडर महिला से प्रेम हो जाता है। इस फिल्म का विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि फिल्म का कंटेंट उनके मूल्य, पारिवारिक व्यवस्था और परंपराएं उससे टकराता है। पाकिस्तान में इस फिल्म का भले ही विरोध हो रहा है लेकिन निजी आजादी एवं पसंद को प्रमुखता से उठाती यह फिल्म अंतरराष्ट्रीय कला मंचों पर पाकिस्तान के लिए नाम कमाया है।

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फिल्म जॉयलैंड के प्रदर्शन पर पाकिस्तान में लगा बैन।

KEY HIGHLIGHTS
  • कान फिल्म समारोह में यह मूवी अवॉर्ड जीतकर पाकिस्तान का नाम कर चुकी है
  • 18 नवंबर को इसे पाकिस्तान के सिनेमाघरों में रिलीज होना था लेकिन लग गया बैन
  • फिल्म का विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि यह मूवी उनकी परंपरा के खिलाफ है

Ban on Joyland : पाकिस्तान में इन दिनों एक फिल्म को लेकर बवाल मचा हुआ है। लोगों के विरोध को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी फिल्म 'जॉयलैंड' को सिनेमा घरों में दिखाए जाने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। देश के सूचना मंत्रालय ने इस फिल्म को जारी होने वाला सेंसर सर्टिफिकेट को यह कहते हुए रद्द कर दिया है कि इसमें 'अत्यंत आपत्तिजनक सामग्री' है। कई अंतरराष्ट्रीय अवार्ड जीत चुकी और सराही जा चुकी यह फिल्म 18 नवंबर को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होनी थी लेकिन सरकार के बैन के बाद लोग सिनेमाघरों में इस फिल्म को देखने से वंचित हो जाएंगे। हैरान करने वाली बात यह है कि फिल्म पर यह बैन तब लगाया गया है जब इसे फेडरल एवं दो प्रांतीय सेंसर बोर्ड से मंजूरी मिल चुकी है।

ट्रांसजेंडर महिला से प्रेम की कहानी

इस फिल्म में एक शादीशुदा व्यक्ति को ट्रांसजेंडर महिला से प्रेम हो जाता है। इस फिल्म का विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि फिल्म का कंटेंट उनके मूल्य, पारिवारिक व्यवस्था और परंपराएं उससे टकराता है। पाकिस्तान में इस फिल्म का भले ही विरोध हो रहा है लेकिन निजी आजादी एवं पसंद को प्रमुखता से उठाती यह फिल्म अंतरराष्ट्रीय कला मंचों पर पाकिस्तान के लिए नाम कमाया है। यह कान फिल्म फेस्टिवल में पुरस्कार जीतने वाली पहली पाकिस्तानी फिल्म है। यही नहीं अमेरिका में 2023 के अकेडमी अवार्ड्स के लिए भी इसकी एंट्री हुई है। सीबीएफसी ने इस फिल्म को सिनेमाघरों में दिखाए जाने के लिए गत अगस्त में फिल्मकार को लाइसेंस दिया लेकिन अब सूचना मंत्रालय ने इस पर यू-टर्न ले लिया है।

फिल्म पर बैन को गैर-कानूनी बताया

फिल्म के निर्देशक सायम सादिक ने सूचना मंत्रालय के इस अचानक यू टर्न को 'असंवैधानिक और गैर कानूनी' बताया है। पाकिस्तान में इस फिल्म का विरोध और समर्थन दोनों देखने को मिल रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के एक करीबी सहयोगी ने मंगलवार को अपने एक ट्वीट में कहा कि 'जॉयलैंड' पर लगे बैन की समीक्षा और इस फिल्म के बारे में शिकायतों को देखने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है। रिपोर्टों में पीएम के सलाहकार सलमान सूफी के हवाले से कहा गया है कि 'फिल्म के बारे में आईं शिकायतों एवं पाकिस्तान में इसके प्रदर्शन के बारे में फैसला समिति करेगी।'

मानवाधिकार आयोग ने भी एक बयान जारी किया

रविवार को पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने भी एक बयान जारी किया। फिल्म पर बैन लगाने के फैसले की आलोचना करते हुए आयोग ने कहा कि 'कौन सी फिल्म देखनी या नहीं देखनी है, इसका फैसला पाकिस्तान के लोगों को करना है।' पाकिस्तान में एक वर्ग ऐसा भी है जो इस फिल्म को प्रदर्शित करने की मांग कर रहा है। लोग सोशल मीडिया पर रिलीज जॉयलैंड हैशटैग के साथ अभियान चला रहे हैं। मूवी में काम करने वाले रस्ती फारूक ने अपने एक इंस्टग्राम पोस्ट पर लिखा है कि 'वह अपनी इस फिल्म के साथ हैं।'

फिल्म के रिलीज पर मिल रही धमकियां?

जमात इस्लामी के सीनेटर मुश्ताक अहमद ने कहा है कि उन्होंने फिल्म नहीं देखी, लेकिन उनका मानना है कि यह बुनियादी तौर पर एलजीबीटीक्यू (समलैंगिकता) संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक सीबीएफसी के चेयरमैन मोहम्मद ताहिर का कहना है कि 'ऐसी धमकियां मिल रही थीं कि जिस सिनेमाघर में यह फ़िल्म लगेगी उसको हम आग लगा देंगे। फिर कहा गया कि ट्रांसजेंडर को मारेंगे, तो इस परिस्थिति में मजबूरी में हमने इजाजतनामा वापस ले लिया।'

आलोक कुमार राव
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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