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Nepal Flash Flood: नेपाल बाढ़ की तबाही की खौफनाक तस्वीर आई सामने, ग्लेशियर के साथ ढहा पहाड़; सैटेलाइट फोटो ने खोली पूरी कहानी

Nepal Flash Flood: नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ के पीछे ग्लेशियर टूटने के साथ पहाड़ की चट्टानों के ढहने की भी बड़ी भूमिका सामने आई है। नई सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबा नदी में गिरा, जिससे बाढ़ की भयावहता बढ़ गई। विशेषज्ञों ने हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते तापमान और ग्लेशियर-पहाड़ों की अस्थिरता को लेकर चिंता जताई है।

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नेपाल में आई बाढ़ की वजह से तबाही की तस्वीर। AP

Nepal Flash Flood: नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र की सीमा पर 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। । इस त्रासदी में 570 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और करीब एक हजार लोग अब भी लापता हैं। अब सैटेलाइट तस्वीरों से इस आपदा के पीछे की पूरी कड़ी सामने आ रही है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह सिर्फ ग्लेशियर टूटने की घटना नहीं थी, बल्कि ग्लेशियर के नीचे मौजूद पहाड़ की चट्टानों का एक बड़ा हिस्सा भी ढह गया था।

दरअसल, यह घटना नेपाल के लांगटांग लिरुंग पर्वत के पास हुई। शुरुआती तस्वीरों में सिर्फ ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटता हुआ दिखाई दिया था, लेकिन बाद की साफ सैटेलाइट तस्वीरों में पता चला कि ग्लेशियर के नीचे मौजूद बेडरॉक यानी पहाड़ की ठोस चट्टान का बड़ा हिस्सा भी टूटकर नीचे आ गया। इसके साथ भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबा संकरी पहाड़ी घाटी में तेजी से नीचे की ओर बढ़ा।

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नेपाल-चीन रासुवागढ़ी सीमा चौकी पर बाढ़ से पहले और बाद की तस्वीर। AP

मलबे ने बदला नदी का रास्ता

ग्लेशियर और चट्टानों के टूटने के बाद पिघली बर्फ और मलबे ने नदियों का रुख बदल दिया। त्रिशूली नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा और पानी अपने साथ भारी मात्रा में मिट्टी और मलबा लेकर नीचे की ओर बहा। सैटेलाइट तस्वीरों में बाढ़ से पहले और बाद के इलाकों में नदी का फैलाव काफी ज्यादा दिखाई दे रहा है।

स्याप्रुबेसी जैसे इलाके बुरी तरह प्रभावित हुए। कई इमारतें और ढांचे पानी और मलबे की चपेट में आकर बह गए। जहां पहले नदी का पानी साफ दिखाई देता था, वहां अब भारी मात्रा में जमा मलबा और गाद नजर आ रही है।

क्या जलवायु परिवर्तन है वजह?

इस घटना ने हिमालय में बढ़ते जलवायु संकट को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान बढ़ने से ग्लेशियरों के साथ-साथ ऊंचाई वाले इलाकों में मौजूद परमाफ्रॉस्ट भी कमजोर हो रहा है। इससे पहाड़ों की ढलान अस्थिर हो सकती है और बड़े पैमाने पर चट्टानों, बर्फ और मिट्टी के खिसकने का खतरा बढ़ सकता है।

हालांकि वैज्ञानिकों ने अभी इस खास घटना को सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन से जोड़ने से सावधानी बरती है। उनका कहना है कि पहाड़ों में भूस्खलन और ढलानों का टूटना प्राकृतिक घटनाएं भी हैं, लेकिन गर्म होती जलवायु ऐसे घटनाक्रमों की संभावना बढ़ा सकती है।

सैटेलाइट तस्वीरों ने दिखाई तबाही की पूरी कहानी

पहले तस्वीरों में सिर्फ ग्लेशियर टूटने का अंदेशा था। लेकिन नई तस्वीरों ने दिखाया कि ग्लेशियर के साथ पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा भी नीचे आया, जिसने बर्फ, चट्टानों और मलबे की एक विशाल लहर पैदा की। यही मलबा और पानी आगे जाकर बाढ़ की भयावह ताकत में बदल गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस आपदा ने हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर और पहाड़ों की बढ़ती अस्थिरता के खतरे को बेहद गंभीर तरीके से सामने रखा है। प्रभावित इलाकों को दोबारा सामान्य स्थिति में आने में लंबा समय लग सकता है।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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