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अंतरिक्ष में फंस गईं सुनीता विलियम्स? जानिए अब क्या कह रहा है NASA, कितनी बची हैं उम्मीदें

World News: क्या सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष में फंस गई हैं? नासा के दो अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर अभी और कितना वक्त रुकेंगे? नासा के वाणिज्यिक चालक दल कार्यक्रम प्रबंधक स्टीव स्टिच ने कहा है कि "मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि हमें घर वापस आने की कोई जल्दी नहीं है।"

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सुनीता विलियम्स, अंतरिक्ष यात्री, NASA

Photo : Times Now Digital

NASA on Sunita Williams: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के दो अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर अभी और अधिक समय तक रुकेंगे, क्योंकि वे वहां अपनी यात्रा के दौरान बोइंग के नए अंतरिक्ष कैप्सूल में आई समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। नासा ने अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी की शुक्रवार को कोई तारीख नहीं बताई और कहा कि वे सुरक्षित हैं।

'हमें घर वापस आने की कोई जल्दी नहीं'

नासा के वाणिज्यिक चालक दल कार्यक्रम प्रबंधक स्टीव स्टिच ने कहा, "मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि हमें घर वापस आने की कोई जल्दी नहीं है।" उन्होंने आईएसएस की सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा, "स्टेशन रुकने और वाहन के साथ काम करने के लिए समय लेने और यह सुनिश्चित करने के लिए एक अच्छी, सुरक्षित जगह है कि हम घर लौटने के लिए तैयार हैं।"

Sunita Williams

सुनीता विलियम्स।

इस महीने की शुरुआत में अंतरिक्ष यात्रियों को ISS ले जाने वाले बोइंग स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान पर संदिग्ध हीलियम लीक का पता चलने से चिंताएं पैदा हुईं। हालांकि, शुक्रवार देर रात एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, नासा के अधिकारियों ने जनता को आश्वस्त किया कि स्थिति नियंत्रण में है।

‘क्रू फ्लाइट टेस्ट मिशन’ से जुड़ा अपडेट

नासा के अनुभवी परीक्षण पायलट सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर अंतरिक्ष में घूमती प्रयोगशाला के लिए पांच जून को बोइंग के स्टारलाइनर के जरिए रवाना हुए थे। विलियम्स और बुच विल्मोर को लेकर बोइंग का ‘क्रू फ्लाइट टेस्ट मिशन’ वर्षों के विलंब और असफलताओं के बाद फ्लोरिडा के ‘केप कैनवेरल स्पेस फोर्स स्टेशन’ से रवाना हुआ था।

विलियम्स और विल्मोर के करीब एक सप्ताह तक अंतरिक्ष में रहने का अनुमान था जो कैप्सूल की जांच करने के लिए पर्याप्त समय था, लेकिन अंतरिक्ष यान को चलाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कैप्सूल की प्रणोदन प्रणाली में समस्याओं के कारण नासा और बोइंग को उनकी धरती पर वापसी की योजना कई बार स्थगित करनी पड़ी। नासा ने बताया कि, "अंतरिक्षयान को सामान्य मिशन पूरा करने के लिए सात घंटे का समय चाहिए तथा इसके टैंकों में अभी इतना हीलियम बचा है कि यह अनडॉकिंग के बाद 70 घंटे तक मुक्त उड़ान भर सकता है।"

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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