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Moscow Terror Attack: आतंकी हमले के बाद रूस में ताबड़तोड़ एक्शन, 4 आतंकी समेत 11 गिरफ्तार...हो चुकी है 140 की मौत

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 24, 2024, 07:11 AM IST

Moscow Terror Attack: रूसी अधिकारियों ने बताया कि मॉस्को के कॉन्सर्ट हॉल में तलाशी अभियान के दौरान 28 शव टॉयलेट और 14 शव सीढ़ियों से बरामद किए गए हैं। उन्होंने बताया, हमले में मारे गए नागरिकों में कुछ की मौत गोली लगने की वजह से हुई है। ज्यादातर मौतें आग के कारण हुईं क्योंकि हमलावरों ने कॉन्सर्ट हॉल में आग लगाने के लिए पेट्रोल का इस्तेमाल किया था।

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मॉस्को आतंकी हमले में अब तक 11 गिरफ्तार

Photo : AP

Moscow Terror Attack: रूस की राजधानी मॉस्को में हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षाबलों का एक्शन जारी है। अधिकारियों ने बताया कि दिल दहला देने वाले इस हमले के बाद 4 आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है, कथित तौर पर कॉन्सर्ट हॉल में इन्हीं लोगों ने गोलीबारी की थी। वहीं 7 अन्य लोगों को हिरासत में लिया गया है। बता दें, आतंकी हमले में अब तक 140 लोग अपनी जान गवां चुके हैं, वहीं 107 लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। हालांकि, रूसी एजेंसियों ने कहा है कि उन्हें अभी तक 133 शव ही बरामद हुए हैं।

हमलावरों की गिरफ्तारी के बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, प्रांभरिक जानकारी के अनुसार, हमले के बाद आतंकियों को छिपने के लिए यूक्रेन की ओर से एक 'खिड़की' तैयार की गई है, जिससे वे आसानी से सीमा पार चलें जाएं। उन्होंने दावा किया है कि हमलावरों को यूक्रेन से मदद मिली थी। रूस की एफएसबी सुरक्षा सेवा ने कहा कि बंदूकधारियों के संपर्क यूक्रेन में थे और उन्हें सीमा के पास पकड़ लिया गया। इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने ली है।

टॉयलेट में मिलीं 28 लाशें

रूसी अधिकारियों ने बताया कि हमले में मारे गए नागरिकों में कुछ की मौत गोली लगने की वजह से हुई है। वहीं, ज्यादातर मौतें आग के कारण हुईं क्योंकि हमलावरों ने कॉन्सर्ट हॉल में आग लगाने के लिए पेट्रोल का इस्तेमाल किया था। उन्होंने बताया, तलाशी अभियान के दौरान 28 शव टॉयलेट और 14 शव सीढ़ियों से बरामद किए गए। रूसी सांसद अलेक्जेंडर खिनशेटिन ने कहा कि हमलावर रेनॉल्ट वाहन में भाग निकले, जिसे पुलिस ने शुक्रवार रात मॉस्को से लगभग 340 किमी (210 मील) दक्षिण-पश्चिम में ब्रांस्क क्षेत्र में देखा था। उन्होंने कहा कार को रोकने की कोशिश की गई, लेकिन वे भाग निकले। इसके बाद उनका पीछा किया गया। कार से एक पिस्तौल, एक असॉल्ट राइफल की मैगजीन और ताजिकिस्तान के पासपोर्ट मिला है।

यूक्रेन ने खारिज किए आरोप

वहीं, यूक्रेन ने मॉस्को में हुए आतंकी हमले में किसी तरह की मिलीभगत के आरोपों का खंडन किया है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा कि यह पुतिन हमारे ऊपर इस आतंकी हमले का दोषारोपण करना चाहते हैं, यही उनकी आदत भी है। वहीं, यूक्रेनी सैन्य खुफिया प्रवक्ता एंड्री युसोव ने बताया कि उनका देश इस आतंकी हमले में शामिल नहीं था। उन्होंने कहा कि देश रूसी आक्रमण के खिलाफ अपनी रक्षा कर रहा है और यह कब्जाधारियों की सेना के खिलाफ लड़ रहा है, न कि नागरिकों के खिलाफ। वहीं, संयुक्त राज्य अमेरिका ने कहा कि अमेरिकी सरकार ने मॉस्को में एक योजनाबद्ध हमले के बारे में रूस के साथ जानकारी साझा की है। इसमें किसी भी तरह की यूक्रेनी भागीदारी से इंकार किया गया है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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