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अफ्रीकी देश नाइजर में सैन्य तख्तापलट, राष्ट्रपति को बनाया गया बंदी; भड़का अमेरिका

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 27, 2023, 07:30 AM IST

Military Coup in Niger: कर्नल मेजर अमादौ अब्द्रमाने अपने कुछ साथी सैनिकों के साथ टीवी पर आए और तख्तापलट का ऐलान किया। उन्होंने बताया राष्ट्रपति को बंदी बनाने के साथ नाइजर की सभी सरकारी संस्थाओं को बर्खास्त कर दिया गया है। देश की सीमाओं को भी बंद कर दिया गया है।

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राष्ट्रपति बजौम को बनाया गया बंदी (फाइल फोटो)

Photo : AP

Military Coup in Niger: अफ्रीकी देश नाइजर से बड़ी खबर सामने आई है। यहां सेना की ओर से दावा किया गया है कि उन्होंने तख्तापलट कर दिया है और राष्ट्रपति मोहम्मद बजौम की सरकार को उखाड़ फेंका है। एक राष्ट्रीय टीवी चैनल पर सेना की ओर से यह ऐलान किया गया है कि उन्होंने राष्ट्रपति बजौम को भी कैद कर दिया है।

इस ऐलान के कुछ घंटों बाद राष्ट्रपति गार्ड के सदस्यों ने बजौम को उनके आधिकारिक आवास से हिरासत में ले लिया। इसके साथ ही सेना की ओर से घोषणा की गई कि नाइजर में सभी सरकारी संस्थाएं निलंबित कर दी गई हैं और सरकारी कर्मचारियों को भी बर्खास्त कर दिया गया है।

टीवी पर आकर दिया बयान

विदेशी मीडिया के मुताबिक, कर्नल मेजर अमादौ अब्द्रमाने अपने कुछ साथी सैनिकों के साथ टीवी पर आए और तख्तापलट का ऐलान किया। उन्होंने कहा, रक्षा और सुरक्षा बलों ने उस शासन को समाप्त करने का फैसला किया है, जिससे आप परिचित हैं। यह सुरक्षा स्थिति की लगातार गिरावट, खराब सामाजिक और आर्थिक प्रबंधन का परिणाम है। सेना की ओर से कहा गया है कि देश की सभी सीमाओं को बंद कर दिया गया है, अब न ही कोई अंदर आ सकता है और न कोई बाहर जा सकता है। देशव्यापी कर्फ्यू लागू कर दिया गया है।

अमेरिका और यूएन ने की मदद की पेशकश

नाइजर में तख्तापलट की जानकारी मिलते ही अमेरिका भड़क उठा है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा है कि वह नाइजर के राष्ट्रपति की हर संभव सहायता करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, संयुक्त राज्य अमेरिका नाइजर के लोकतांत्रिक रूप से चुने गए राष्ट्रपति के रूप में उनका दृढ़ता से समर्थन करता है। वहीं संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी उन्हें अपना पूरा समर्थन देने की बात की है। राष्ट्रपति को मिले इस समर्थन पर नाइजर की सेना ने आपत्ति जताते हुए अंजाम भुगतने की चेतावनी दी है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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