MEA Refutes ONN Claim: ईरान युद्ध को लेकर एक अमेरिका स्थित न्यूज चैनल पर किए जा रहे भ्रामक दावे का विदेश मंत्रालय ने खंडन किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा- अमेरिका स्थित चैनल वन अमेरिका न्यूज (ओएएन) पर किए जा रहे ये दावे कि भारतीय बंदरगाहों का इस्तेमाल अमेरिकी नौसेना द्वारा किया जा रहा है, निराधार और झूठे हैं। मंत्रालय ने आधिकारिक फैक्ट चेक हैंडल से पोस्ट करके ऐसी खबरों को फर्जी बताया है।
ओएएन के दावों का खंडन
विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी समाचार चैनल वन अमेरिका न्यूज (ओएएन) के उन दावों का खंडन किया है, जिनमें कहा गया था कि भारतीय बंदरगाहों का उपयोग अमेरिकी नौसेना कर रही है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक फैक्ट चेक हैंडल ने इन खबरों को पूरी तरह से झूठा और निराधार बताया है। मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि फर्जी खबरों से सावधान! अमेरिका स्थित चैनल ओएएन पर किए जा रहे ये दावे कि भारतीय बंदरगाहों का इस्तेमाल अमेरिकी नौसेना कर रही है, पूरी तरह से झूठे और निराधार हैं। हम आपको ऐसे आधारहीन और मनगढ़ंत दावों से सावधान करते हैं।
ईरानी जहाज IRIS Dena को डुबोया
बता दें कि ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच युद्ध बड़े स्तर पर छिड़ गया है। अब समुद्र में भी युद्धपोतों को निशाना बनाया जा रहा है। मिडिल ईस्ट में ईरान अमेरिका और इस्राइल के टकराव के बीच एक बड़ा अपडेट हिंद महासागर से आया है। यहां अमेरिका के हमले में एक ईरानी जहाज ‘IRIS Dena’ डूब गया है। जिससे बड़ा समुद्री संकट पैदा हो गया। श्रीलंका के तट के पास हिंद महासागर में हुई इस घटना में कम से कम 80 नौसैनिकों की मौत हो गई। वहीं, कई लोग अभी भी लापता हैं।
श्रीलंका के अधिकारियों ने अमेरिकी पनडुब्बी हमले में मारे गए ईरानी नौसैनिकों के लगभग 80 शव बरामद किए हैं।इससे पहले श्रीलंका ने बताया था कि उसकी नौसेना ने आज सुबह दक्षिणी जलक्षेत्र में संकटग्रस्त ईरानी फ्रिगेट आईआरआईआईएस डेना - से 32 ईरानी नाविकों को बचाया। फ्रिगेट पर लगभग 180 नाविक सवार थे।
वहीं, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने श्रीलंका में ईरानी युद्धपोत पर हमले को लेकर बात स्वीकारी। उन्होंने दावा किया कि संयुक्त राज्य अमेरिका की एक पनडुब्बी ने श्रीलंका के तट से दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक ईरानी युद्धपोत को टॉरपीडो से डुबो दिया है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन में एक ब्रीफिंग में हेगसेथ ने कहा कि ईरानी युद्धपोत पर हमला द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किसी दुश्मन पर इस तरह का पहला हमला था।
