क्या भारत का मोस्ट वांटेड आतंकी और जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मसूद अजहर (Masood Azhar ) मारा जा चुका है? यह सवाल इसलिए पूछा जा रहा है क्योंकि पाकिस्तानी फौज और वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने उसे लेकर एक अघोषित आदेश जारी किया है। इस आदेश में कहा गया है कि पाकिस्तान का कोई भी टीवी चैनल, अखबार या वेबसाइट मसूद अजहर से जुड़ी कोई खबर नहीं चलाएंगे और न ही छापेंगे।
साथ ही, मीडिया संस्थानों के मालिकों को यह आगाह किया गया है कि यदि उनके संस्थानों द्वारा मसूद अजहर से जुड़ी कोई भी जानकारी सामने आई, तो उन्हें इसके गंभीर नतीजे भुगतने होंगे।
जानकारी के मुताबिक, मसूद अजहर की तबीयत बहुत ही नाजुक है। इसी साल मार्च के महीने में उसने जैश के आतंकियों के लिए एक ऑडियो जारी किया था, जिसमें वह लगातार खांसता हुआ सुनाई दे रहा था। इतना ही नहीं, ऑडियो के आखिरी हिस्से में मसूद अजहर ने आतंकियों से अपने लिए दुआ मांगने के लिए भी कहा था। 2001 के संसद हमले से लेकर 2019 के पुलवामा ब्लास्ट जैसी आतंकी वारदातों को अंजाम देने वाला मसूद अजहर न सिर्फ अस्वस्थ है, बल्कि वह मानसिक रूप से भी परेशान है।
बताया जा रहा है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान उसने अपने परिवार के कई करीबी सदस्यों को खो दिया, जिससे वह बहुत आहत है। तब से उसने बाहर आने और यहां तक कि अपने संगठन के सदस्यों से बात करने से भी इनकार कर दिया है।
आतंकी अजहर की कुडंली
मसूद अजहर का जन्म 10 जुलाई 1968 को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत (बहावलपुर) में हुआ था। उसके पिता, अल्लाह बख्श शब्बीर, एक सरकारी स्कूल के हेडमास्टर थे। अपने 11 भाई-बहनों में तीसरे नंबर का मसूद शुरुआत में एक सामान्य छात्र था, लेकिन 8वीं कक्षा के बाद उसकी दिशा पूरी तरह बदल गई।मसूद ने मुख्यधारा की शिक्षा छोड़कर मदरसे में दाखिला लिया, जहां से 1989 में उसने 'आलिम' की डिग्री हासिल की। यह मदरसा आतंकी संगठन 'हरकत-उल-अंसार' (HUA) का वैचारिक केंद्र था। मसूद की भाषाई पकड़ के कारण उसे संगठन की पत्रिका 'साद-ए-मुजाहिद्दीन' का संपादक बनाया गया।
अपनी कट्टरपंथी विचारधारा और भाषण शैली के दम पर वह जल्द ही HUA का जनरल सेक्रेटरी बन गया। उसका मुख्य काम आतंकियों की भर्ती करना और आतंकी गतिविधियों के लिए फंड जुटाना था।
भारत में गिरफ्तारी और जेल
फरवरी 1994 में मसूद अजहर फर्जी पासपोर्ट पर कश्मीर घाटी में दाखिल हुआ, ताकि गुटों के बीच चल रही आपसी कलह को सुलझा सके। हालाँकि, भारतीय सुरक्षा बलों ने उसे अनंतनाग से गिरफ्तार कर लिया। वह अगले कई सालों तक भारतीय जेल में बंद रहा।
IC-814 हाईजैक
काठमांडू से दिल्ली आ रहे इंडियन एयरलाइंस के विमान IC-814 को आतंकियों ने हाईजैक कर लिया और उसे अफगानिस्तान के कंधार ले गए। विमान में 178 यात्री सवार थे। आतंकियों ने इन मासूमों की जान के बदले मसूद अजहर समेत तीन बड़े आतंकियों की रिहाई की मांग रखी। सात दिनों तक चले तनावपूर्ण घटनाक्रम के बाद, भारत सरकार को यात्रियों की सुरक्षा के लिए मजबूरन मसूद अजहर, अहमद उमर सईद शेख और मुश्ताक अहमद जरगर को रिहा करना पड़ा।
रिहाई के बाद का अंजाम
जेल से छूटने के बाद मसूद अजहर ने पाकिस्तान जाकर 'जैश-ए-मोहम्मद' नाम का नया आतंकी संगठन बनाया। इसी संगठन ने आगे चलकर भारतीय संसद (2001), पठानकोट एयरबेस (2016) और पुलवामा (2019) जैसे जघन्य हमलों को अंजाम दिया। आज वह संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित एक 'वैश्विक आतंकवादी' है।
